भारत में रहने वाले सभी लोग पहचान के मामले में हिंदू हैं। यह कहना है राष्ट्रीय स्वयंसेवक सरसंघचालक मोहन भागवत का जिन्होंने बुधवार को अपने संगठन के दर्शन को समझाया।
भागवत 'भविष्य के भारत पर संघ का दृष्टिकोण विषय' पर दिल्ली में आयोजित संघ के तीन दिवसीय कार्यक्रम के आखिरी दिन बोल रहे थे, जहां उन्होंने हिंदुत्व, शिक्षा और जाति जैसे विषयों पर संघ के विचारों के बारे में बताया।
भागवत ने कहा, "यह भारतीय संस्कृति और हिंदुत्व है जो विचार की अन्य पद्धतियों के साथ काम करने में विश्वास करती है। भारत में रहने वाले सभी लोग पहचान और राष्ट्रीयता के मामले में हिंदू हैं।"
आरएसएस के ट्विटर हैंडल के मुताबिक भागवत ने कहा, "हिंदूवाद एक गलत शब्द है - "वाद" एक पुरानी अवधारणा है। हिंदुत्व कोई "वाद" नहीं बल्कि एक गतिशील प्रक्रिया है। गांधी जी ने कहा है कि सच्चाई की अंतहीन खोज का मतलब हिंदुत्व है। एस राधाकृष्णन ने कहा है कि हिंदुत्व एक निरंतर प्रक्रिया है।"
व्याख्यान श्रृंखला के दूसरे दिन भागवत ने मंगलवार को कहा था कि एक हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना मुस्लिमों को छोड़कर नहीं की गई है और आरएसएस संविधान और देश के कानून के खिलाफ नहीं गया है।
उन्होंने कहा, "हमें लगता है कि हर किसी को संविधान का पालन करना चाहिए... आरएसएस कभी संविधान के खिलाफ नहीं गया है। निश्चित रूप से, धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी शब्द बाद में जोड़े गए थे, लेकिन अब वे वहां हैं।"
भागवत ने कहा कि एक हिंदू राष्ट्र की अवधारणा किसी भी समुदाय या विश्वास को अलग करने या अस्वीकार करने पर निर्भर नहीं है। "हिंदू राष्ट्र का मतलब यह नहीं है कि मुस्लिमों के लिए कोई जगह नहीं है। जिस दिन ऐसा हो जाएगा, यह हिंदुत्व नहीं रहेगा। भागवत ने कहा, हिंदुत्व पूरे विश्व परिवार के बारे में बात करता है। आरएसएस भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का वैचारिक मातृ संगठन है।