राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने कहा है कि जाति को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। संघ के संयुक्त महासचिव कृष्ण गोपाल ने रविवार को यहां इसका उल्लेख करते हुए इस बात पर जोर दिया कि लोगों को उम्मीदवार की योग्यता के आधार पर मतदान करना चाहिए। विश्व पुस्तक मेले में एक पुस्तक के विमोचन के अवसर पर उन्होंने यह बात कही।
जाति के कारण देश में गहरे मतभेद पर दुख व्यक्त करते हुए कृष्ण गोपाल ने कहा कि जाति के आधार पर भेदभाव एक सामाजिक बुराई है और उसे तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का इसमें निजी और राजनीतिक स्वार्थ है और वह जाति को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करते हैं, जो लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। किसी उम्मीदवार का चयन उसकी योग्यता और काबिलियत के आधार पर होना चाहिए न कि उसकी जाति के आधार पर।
हिंदुत्व पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह नए विचारों और राय का स्वागत करता है। उन्होंने कहा कि ऋगवेद की ऋचाओं में प्राचीन काल में साध्वियों और तथाकथित छोटी जाति के लोगों को भी वेद मंत्र दिए जाते थे। उन दिनों किसी व्यक्ति की योग्यता पर सब कुछ निर्भर रहता था, लेकिन वह व्यवस्था कहीं खो गई है। गोपाल ने कहा कि भारतीय समाज और उसके सिद्धांत में संघर्ष को स्थान नहीं है, बल्कि उसमें शांति और सौहार्द है। यहां तक कि 50-60 साल पहले कुछ विदेशी राष्ट्र भी मार्क्सवाद से खुद को अलग रखते थे।