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बजट से आरएसएस के सहयोगी संगठन भी नाराज, बीएमएस ने कहा-विनिवेश का निर्णय निराशाजनक

Mon, 01 Feb 2021 08:47 PM IST
सुरेंद्र जोशी डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारतीय मजदूर संघ. file photo - फोटो : File Photo
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बजट-2021 से विपक्षी दल ही नहीं आरएसएस के सहयोगी संगठन भी नाराज हैं। आरएसएस की श्रमिक इकाई भारतीय मजदूर संघ ने बजट को लेकर गहरी निराशा जताई है। संगठन ने कहा है कि बजट को लेकर दी गई उसकी ज्यादातर मांगें नहीं मानी गई हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का विनिवेश दुर्भाग्यपूर्ण है। इन कंपनियों में काम करने वाले मजदूरों के हितों की कोई चिंता नहीं की गई है। संगठन ने बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश बढ़ाने को आत्मनिर्भर भारत की भावना के विरूद्ध बताया है।

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भारतीय मजदूर संघ 12-14 फरवरी को चेन्नई में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बजट पर विशेष चर्चा कर अपनी आगे की रणनीति तय करेगा। भारतीय मजदूर संघ के जनरल सेक्रेटरी बीके सिंहा ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प एक महत्वाकांक्षी योजना थी। 

इससे देश को आर्थिक और तकनीकी तौर पर ज्यादा मजबूत बनाने में मदद मिलती, लेकिन सरकार ने प्रमुख कंपनियों के विनिवेश का जो निर्णय लिया है, उससे लाखों श्रमिकों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा। उनकी रोजी-रोटी की कोई स्पष्ट चिंता नहीं की गई है। संगठन ने कहा है कि यहां तक कि कुछ नए प्रोजेक्ट्स जिनमें रोजगार की नई संभावनाएं बन सकती हैं, उनमें इन श्रमिकों को समायोजित करने जैसी कोई योजना नहीं बनाई गई है।
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बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत किए जाने की घोषणा पर भी भारतीय मजदूर संघ ने चिंता जताई है। संगठन ने कहा है कि ऐसा करने से भारतीय अर्थव्यवस्था की विदेशी पूंजी पर निर्भरता बढ़ेगी। भारतीय जीवन बीमा निगम जैसे महत क्षेत्रों में आईपीओ लाने को भी संगठन ने उचित नहीं बताया है।

बजट को बनाने के पूर्व श्रमिकों के हितों के लिए संगठन की तरफ से कई सुझाव दिए गए थेे। लेकिन बंगाल के चाय बगानों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए विशेष राशि निर्धारित करने के अलावा उसकी कोई भी सलाह नहीं मानी गई है। संगठन ने श्रमिकों के लिए पांच हजार रूपये मासिक पेंशन दिए जाने की भी मांग की थी। 

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