केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को घोषणा की कि पश्चिम बंगाल में रेलवे की तरफ से 60,000 करोड़ रुपये के निवेश का अवसर है। इस दौरान उन्होंने इस बात का खुलासा किया कि रेलवे को भूमि सौंपने से जुड़े मुद्दों के कारण राज्य में मौजूदा में 61 परियोजनाएं रुकी हुई हैं, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए टीएमसी सरकार को राजनीति से ऊपर उठने की जरूरत है।
'राज्य सरकार के सहयोग से पूरी होंगे योजनाएं'
सियालदह स्टेशन पर कई रेलवे परियोजनाओं और ट्रेन सेवाओं का उद्घाटन करने के बाद रेल मंत्री ने कहा, कि इस तरह के निवेश तभी संभव होंगे जब राज्य सरकार सहयोग करेगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 26 किलोमीटर की मेट्रो रेलवे परियोजनाएं हैं जहां भूमि संबंधी मुद्दों के कारण काम आगे नहीं बढ़ सकता है।
'रेलवे परियोजनाओं को लेकर नहीं होनी चाहिए राजनीति'
ब्रेथवेट एंड कंपनी लिमिटेड में स्वच्छ भारत कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बात करते हुए, जहां उन्होंने पीएसयू का निरीक्षण भी किया, अश्विनी वैष्णव ने लोगों के कल्याण को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने आगे कहा कि विकास समय की मांग है, रेलवे परियोजनाओं को लेकर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। अगर राज्य सरकार हमारा समर्थन करती है, तो लोगों की भलाई के लिए इन 61 लंबित परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है।
वहीं आरजी कर अस्पताल में एक महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म-हत्या से जुड़े मामले के जवाब में उन्होंने कहा, कि पूजा का मौसम शुरू हो गया है, और हम अपनी बेटी, अपनी बहन के लिए न्याय की प्रार्थना कर रहे हैं।
कवच को लेकर रेल मंत्री ने दी जानकारी
रेलवे दुर्घटनाओं के बारे में चिंताओं को लेकर उन्होंने कवच 4.2 के पूरा होने समेत सुरक्षा उपायों में महत्वपूर्ण प्रगति का उल्लेख किया। रेल मंत्री ने कहा- रेलवे सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कवच का विकास अब पूरा हो गया है। कवच 4.2 को हाल ही में कोटा और सवाई माधोपुर में लागू किया गया है, जिसमें लगभग 2,000 किमी रेलवे ट्रैक और 900 लोकोमोटिव शामिल हैं, जो बड़े पैमाने पर सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करते हैं।
NDA-UPA सरकारों की रेल मंत्री ने की तुलना
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेल मंत्रालय प्रणालीगत और संरचनात्मक मुद्दों को संबोधित करने के लिए हर दुर्घटना के कारणों की गहन जांच करता है। दस साल पहले, सालाना 171 दुर्घटनाएं होती थीं, लेकिन पिछले साल यह संख्या घटकर 40 हो गई है - 60 प्रतिशत से अधिक की कमी। यूपीए सरकार के तहत औसतन 450-500 सालाना पटरी से उतरने की घटनाएं अब घटकर लगभग 80 हो गई हैं। इस महत्वपूर्ण कमी का श्रेय प्रौद्योगिकी में प्रगति, बेहतर रखरखाव प्रथाओं और रेलवे कर्मचारियों के लिए उन्नत प्रशिक्षण को दिया जाता है।