आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ ने कहा, पिछले एक दशक में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के उपयोग से सही लाभार्थियों तक पैसा पहुंचा है। इससे फर्जी खातों को खत्म किया गया है। इस कारण करदाताओं के पैसे की भारी बचत हुई है।
डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (डीपीआई) से सरकारी योजनाओं में 27 अरब डॉलर (2.24 लाख करोड़ रुपये) से अधिक की बचत हुई है। साथ ही, कम अवधि में अधिक वित्तीय समावेशन हासिल हुआ है। आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ ने कहा, पिछले एक दशक में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के उपयोग से सही लाभार्थियों तक पैसा पहुंचा है। इससे फर्जी खातों को खत्म किया गया है। इस कारण करदाताओं के पैसे की भारी बचत हुई है।
सेठ ने कहा, भारत ने डीपीआई के साथ 7-8 वर्षों में 20 प्रतिशत से 80 प्रतिशत खाता खोलने की पहुंच हासिल कर ली है। अगर सामान्य तरीके से किया जाता तो इतना खाता खोलने में 47 साल लग जाते। हमने अंतिम छोर तक और यहां तक कि देश के सबसे दूरदराज के हिस्सों में भी सर्वोत्तम श्रेणी की सेवाएं प्रदान करने के लिए एक समाधान दृष्टिकोण विकसित किया है। डिजिटल पहचान संख्या, प्रधान मंत्री जन धन योजना के 2014 में लॉन्च के बाद से 50 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए हैं। इसमें से 56 प्रतिशत बैंक खाताधारक महिलाएं हैं। 67 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं। इन खातों में औसत बैलेंस राशि 4,000 रुपये से अधिक है। डिजिटल भुगतान प्रणाली का यूपीआई अकेले अगस्त महीने में 10 अरब का आंकड़ा पार कर गया है। आज, 5.5 करोड़ से अधिक जन धन खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) लोगों को मिल रहा है।