महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने मंगलवार को आरोप लगाया कि उनके करीबी सहयोगी और तत्कालीन गृह मंत्री आरआर पाटिल ने कथित बहु-करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले में उनके खिलाफ खुली जांच का आदेश देकर उनकी पीठ में छुरा घोंपा है। बता दें कि अजित पवार 1999-2009 के दौरान जल संसाधन विकास मंत्री थे, जब महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन सत्ता में थी। उन्होंने विदर्भ सिंचाई विकास निगम के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया था, जिसने सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी थी, जिसमें कथित अनियमितताएं थीं।
परियोजना की राशि से ज्यादा राशि के घोटाले का आरोप
अजित पवार ने दावा किया, सिंचाई घोटाले में मेरे खिलाफ आरोप लगाए गए, मुझे बदनाम करने की कोशिश की गई। सिंचाई परियोजना में 70,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाने का फैसला किया गया। परियोजना में वेतन का कुल खर्च 42,000 करोड़ रुपये था और 70,000 करोड़ रुपये की अनियमितता का आरोप लगाया गया। उन्होंने ने कहा कि परियोजना के लिए वास्तविक व्यय 43,000 करोड़ रुपये था, लेकिन यह दिखाने के लिए मामला बनाया गया कि 70,000 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है।
आरआर पाटिल ने मेरी पीठ में छुरा घोंपा- अजित
अजित पवार ने दावा किया, एक फाइल तैयार की गई और गृह विभाग (आर आर पाटिल की अध्यक्षता में) को भेज दी गई। उन्होंने मेरे खिलाफ खुली जांच को मंजूरी दी और फाइल नोट में इसका उल्लेख किया। यह पूरी तरह से पीठ में छुरा घोंपने का मामला था। मैं बहुत परेशान हो गया क्योंकि वह (पाटिल) मेरे करीबी सहयोगी थे। उन्होंने कहा कि इसके बाद एनसीपी (अविभाजित) ने पृथ्वीराज चव्हाण के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।
देवेंद्र फडणवीस ने मुझे दिखाई फाइल- अजीत पवार
उन्होंने दावा किया, तत्कालीन राज्यपाल ने फाइल (खुली जांच के लिए) पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया और कहा कि नए सीएम को इस पर हस्ताक्षर करने दें। बता दें कि शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले कांग्रेस के साथ संबंध तोड़ने की घोषणा के बाद सितंबर 2014 में तत्कालीन पृथ्वीराज चव्हाण के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। अजित पवार ने दावा किया, जब देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आई, तो उन्होंने फाइल पर हस्ताक्षर किए और बाद में मुझे बुलाया। उन्होंने कहा कि फाइल सीएम के हस्ताक्षर का इंतजार कर रही है। उन्होंने मुझे बताया कि यह आरआर पाटिल थे जिन्होंने जांच शुरू की और मुझे फाइल पर अपने हस्ताक्षर दिखाए। मैं बहुत परेशान था क्योंकि वह (पाटिल) मेरे करीबी सहयोगी थे।
एसीबी ने 2019 में अजित पवार को दी थी क्लीन चिट
विशेष रूप से, महाराष्ट्र के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 28 नवंबर, 2019 को शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस की महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के शपथ लेने के बाद करोड़ों रुपये के विदर्भ सिंचाई घोटाले में अजीत पवार को क्लीन चिट दे दी थी। आर आर पाटिल ने 2004 से 2014 तक कांग्रेस-एनसीपी सरकारों के कार्यकाल के दौरान काफी समय तक राज्य के गृह मंत्री के रूप में कार्य किया था।