बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक ने शनिवार को ओडिशा के भाजपा सांसदों को पत्र लिखाकर अपनी नाराजगी जताई। इसमें उन्होंने एमएमडीआर एक्ट में किए गए उन संशोधनों को वापस लेने की मांग करने का आग्रह किया है। जो मिनरल राइट्स और मिनरल वाली जमीन पर टैक्स लगाने के राज्यों के अधिकारों को सीमित करते हैं।
पटनायक ने सत्ताधारी पार्टी के सांसदों से यह भी अपील की कि वे उन लोगों के हितों की रक्षा करें जिन्होंने उन्हें संसद के लिए चुना है। पटनायक ने पत्र में कहा, 'मैं आपसे (भाजपा सांसदों से) ईमानदारी से अपील करता हूं कि आप अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें और ओडिशा की आने वाली पीढ़ियों के बारे में सोचें। मैं आपसे अपील करता हूं कि आप एमएमडीआर एक्ट में किए गए उस संशोधन को चुनौती दें और उसे पलटने की मांग करें, जिससे राज्य सरकार की शक्तियां छिन जाती हैं।'
यह कहते हुए कि संसद भारतीय लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर है, पटनायक ने कहा कि सांसद लोकतंत्र के इस सबसे बड़े मंच पर ओडिशा की आवाज़ हैं।
पटनायक ने किसे चिंता की बात बताया?
पटनायक ने पत्र में लिखा, 'ओडिशा के लोगों ने अपने हितों की रक्षा के लिए आप पर भरोसा करके आपको चुना था। इसलिए यह बहुत चिंता की बात है कि आपने एक ऐसे मनमाने कानून के पक्ष में वोट दिया, जिसके ओडिशा के उन लोगों पर दूरगामी और बुरे असर पड़ेंगे जिन्होंने आप पर भरोसा किया था।'
13 अगस्त को काला दिन क्यों बताया?
उन्होंने कहा कि 13 अगस्त, जब लोकसभा में ओडिशा के भाजपा सांसदों के समर्थन से 'खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम संशोधनों बिल, 2026' पास हुआ। यह राज्य के लिए एक काला दिन था। उन्होंने पत्र में लिखा, 'लोकसभा में इस बिल पर दस मिनट से भी कम चर्चा हुई, जबकि इसमें ऐसे प्रावधान थे जिनका ओडिशा के लोगों पर दूरगामी असर पड़ने वाला था। यह कोई मामूली कानून नहीं था।'
संसद ने इस महीने की शुरुआत में 'माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026' पास किया था। पटनायक ने हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर उनसे एमएमडीआर अमेंडमेंट एक्ट, 2026 पर चर्चा करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का अनुरोध किया था।