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आयुर्वेद से लौटी आंखों की रोशनी: पढ़िए केन्या के पूर्व पीएम की बेटी की कहानी, प्रधानमंत्री मोदी ने भी किया जिक्र

Wed, 20 Apr 2022 08:13 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर

सार

एन्युरिज्म के चलते आंखों की रोशनी गंवाने वाली केन्या के पूर्व प्रधानमंत्री की बेटी ने इलाज के लिए कई देशों की यात्रा की लेकिन उन्हें फायदा भारत में आयुर्वेदिक इलाज से ही मिला। 
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रोजमैरी ओडिंगा - फोटो : वीडियो स्क्रीनग्रैब
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को गुजरात के गांधीनगर में हुए एक कार्यक्रम में केन्या के पूर्व प्रधानमंत्री राइला ओडिंगा की बेटी रोजमैरी ओडिंगा का उल्लेख किया। मोदी ने कहा कि रोजमैरी की कहानी इस बात की गवाही है कि आयुष के समाधान वैश्विक स्तर पर प्रभावी हैं क्योंकि उन्होंने अपनी खोई हुई आंखों की रोशनी के वापस आने का श्रेय आयुर्वेद को दिया है। 

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रोजमैरी का केरल के एक अस्पताल में आयुर्वेदिक इलाज चला था। ऑप्टिकल नर्व में ब्रेन एन्युरिज्म (नसों में कमजोरी) और एट्रोफी (मांसपेशियों का सिकुड़ना) के चलते उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। उन्होंने कहा, 'मेरे ख्याल से यह इस बात का प्रमाण है कि आयुष ने भारत के अलावा बाहर भी, दुनिया के किसी अन्य हिस्से में किसी की सहायता की है।'

केन्या के पूर्व प्रधानमंत्री की बेटी ने इस मौके पर कहा कि इस बात में कोई शक नहीं है कि आयुष के समाधान वैश्विक हैं और मुझे इस कहानी का हिस्सा बन कर गर्व का अनुभव हो रहा है। बता दें कि आयुष का अर्थ आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध व होम्योपैथी से है। इस वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के लिए भारत में एक अलग से मंत्रालय बनाया गया है। 

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इलाज के लिए कई देशों के लगाए चक्कर, भारत में मिली सफलता
रोजमैरी गांधीनगर में ग्लोबल आयुष इन्वेस्टमेंट एंड इनोवेशन शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने आई थीं। उन्होंने कहा कि साल 2018 में मुझे एन्युरिज्म की समस्या हो गई थी और इसके चलते मेरी देखने की क्षमता कमजोर हो गई थी। इलाज के लिए जर्मनी, जापान और दक्षिण अफ्रीका भी गई थीं। वह दो बार चीन गई थीं जहां एक्यूपंक्चर से उनका इलाज किया गया था।

लेकिन, सब ओर हाथ-पैर मार लेने के बाद भी जब सफलता नहीं मिली तो रोजमैरी ओडिंगा का परिवार भारत आया। यहां केरल के एर्नाकुलम में लगभग दो साल पहले श्रीधरीयम आयुर्वेदिक आई हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में रोजमैरी की आंखों का इलाज शुरू हुआ था। यहां पर तीन-तीन सप्ताह के दो सत्रों में उनका इलाज शुरू किया गया और इलाज जारी रहा।

'पहले सत्र के बाद ही दिखने लगा था आयुर्वेदिक इलाज का असर'
सम्मेलन में रोजमैरी का इलाज करने वाले अस्पताल के मुख्य फिजीशियन डॉ. नारायणन नंबूथिरि भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा, दो साल पहले रोजमैरी जब हमारे पास आई थीं तब वह कुछ भी देख नहीं पा रही थीं। उन्हें रोशनी का कुछ अंदाजा हो रहा था लेकिन देखने में स्पष्टता बिल्कुल नहीं थी। वह हमारे पास अन्य देशों में कई तरह के इलाज करवाने के बाद आई थीं। 

डॉ. नारायणन ने बताया कि अस्पताल में उनका शुद्ध आयुर्वेदिक इलाज किया गया। इसमें खाई जाने वाली दवाएं के साथ इलाज के अन्य तरीकों का उपयोग किया गया। उन्हें विशेष मसाज 'तेल धारा' दी गई जो आंखों और सिर के आस-पास की जाती है। पहले सत्र के बाद ही इलाज का असर दिखने लगा था और इलाज पूरा होने के बाद अब वह साफ देख सकती हैं।
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इलाज करने वाले डॉक्टर को देख ऐसी रही रोजमैरी की प्रतिक्रिया
यहां रोजमैरी ने डॉ. नंबूथिरि से मुलाकात की और इस दौरान उनकी खुशी एकदम स्पष्ट दिखाई दे रही थी। रोजमैरी ने कहा, 'जब मैं पहली बार उनसे मिली थी तब मैं उन्हें देख नहीं पा रही थी। मैं केवल उनकी आवाज सुन सकती थी। लेकिन आज मैं उन्हें देख पा रही हूं।' केन्या के पूर्व प्रधानमंत्री की बेटी के इस सफल इलाज ने आयुर्वेद की प्रतिष्ठा और मजबूत की है। 

वहीं, अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने रोजमैरी की कहानी का उल्लेख किया कि उनके पिता को अपना मित्र बताया। उन्होंने कहा कि मैंने एक बार नई दिल्ली में राइला ओडिंगा से मुलाकात की थी। तब उन्होंने मुझे अपनी बेटी की स्थिति के बारे में जानकारी दी थी और बताया था कि किस तरह आयुर्वेदिक इलाज से उसकी आंखों की रोशनी वापस आ रही है।
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