महंगाई का असर सिर्फ डीजल और पेट्रोल पर ही नहीं पड़ा है बल्कि महंगाई का असर 'फांसी के फंदे' तक पर पड़ गया है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि फांसी का फंदा आज से दस साल पहले की कीमत से काफ़ी ज्यादा महंगा हो गया है। यह महंगाई कपास की बढ़ी हुई कीमतों के अलावा धागों की बढ़ी कीमतों के कारण हुई है। दरसल फांसी का फंदा कपास और अन्य कई तरह के धागों से मिलकर बनाया जाता है।
फांसी के फंदे में पीतल का बुश भी लगाया जाता है। ताकि फंदे में ग्रिप बनी रहे। इस बुश की भी कीमत बढ़ गयी है। यही वजह है कि फांसी के फंदे की कीमत पहले की तुलना में कुछ ज्यादा बढ़ गयी है।
तिहाड़ जेल में इंदिरा गांधी के हत्यारों की फांसी से लेकर रंगा बिल्ला और अफजल गुरु समेत पांच अन्य को फांसी के तख्ते पर झूलते हुए देखने वाले तिहाड़ जेल के पूर्व लॉ ऑफिसर सुनील गुप्ता कहते हैं कि फांसी के फंदे की कीमत लगातार बढ़ रही है। हालांकि इसकी अपने देश मे अब तक जरूरत बहुत ज्यादा नहीं पड़ी, लेकिन पिछले आठ दस सालों में गौर करें तो महंगाई बढ़ने पर फांसी के फंदे महंगे हुए हैं।
जितने लोगों को फांसी पर चढ़ाया जाता है, उससे ज्यादा ही फांसी के फंदे बक्सर की जेल से मंगवाए जाते है। ताकि फांसी देते वक्त किसी भी प्रकार की अड़चन सामने न आए।
जेल मैनुअल के मुताबिक फांसी की रस्सी का जेल में स्टॉक रखना पड़ता है। ताकि जरूरत पर कम न पड़े। 2013 में जब अफजल गुरु को फांसी दी जा रही थी, तब तीन फांसी के फंदे टूट गए थे। चूंकि फंदे ज्यादा थे इसलिए अफजल के केस में कोई दिक्कत नहीं हुई।