महाराष्ट्र में किसान कर्ज माफी का मुद्दा अब गरमा गया है। पुणे के पास पंढरपुर में एक बड़ा आंदोलन चल रहा है। एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आज उनके अनशन का दूसरा दिन है। सरकार की नई कर्ज माफी योजना में कुछ ऐसी शर्तें हैं, जो किसानों को मंजूर नहीं हैं। रोहित पवार का साफ कहना है कि जब तक ये शर्तें नहीं हटेंगी, तब तक वे अनशन नहीं छोड़ेंगे।
रोहित पवार ने शुक्रवार को यह भूख हड़ताल शुरू की थी। वे कर्जत-जामखेड़ से विधायक हैं। वे चाहते हैं कि किसानों का पूरा कर्ज बिना किसी शर्त के माफ हो। राज्य सरकार ने हाल ही में 'पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर शेतकरी कर्ज-मुक्ति योजना' का एलान किया है। सरकार का दावा है कि इसमें 36,585 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे करीब 56 लाख किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। योजना में कर्ज माफी और ओटीएस यानी एकमुश्त निपटान जैसे विकल्प दिए गए हैं, लेकिन सच्चाई कुछ और है।
इन दो शर्तों ने बढ़ाई मुश्किल
रोहित पवार ने दो ऐसी शर्तों पर सवाल उठाए हैं, जो किसानों का दम घोंट रही हैं। पहली शर्त उन किसानों के लिए है, जिन्होंने 2019 की कर्ज माफी योजना का लाभ लिया था। सरकार ने नियम बनाया है कि उन्हें अब केवल 50,000 रुपये तक की ही राहत मिलेगी। दूसरी शर्त और भी कठिन है। सरकार ने कहा है कि अगर किसान को प्रोत्साहन सब्सिडी चाहिए, तो उन्हें 2025-26 और 2026-27 के फसल ऋण समय पर चुकाने होंगे। रोहित पवार का मानना है कि जो किसान पहले से ही कर्ज में डूबा है, वह भविष्य के कर्ज को चुकाने का वादा कैसे कर सकता है? सरकार को किसानों की मजबूरी समझनी चाहिए।
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37 लाख किसान योजना से बाहर
रोहित पवार के मुताबिक, इन दो शर्तों के कारण राज्य के 37 लाख से ज्यादा किसान कर्ज माफी के लाभ से बाहर हो जाएंगे। वे इसे किसानों के साथ अन्याय मान रहे हैं। पंढरपुर के अनशन स्थल पर उनके पिता राजेंद्र पवार भी पहुंचे। उन्होंने रोहित के आंदोलन को अपना पूरा समर्थन दिया है। रोहित का कहना है कि वे अपनी मांग से पीछे नहीं हटेंगे। उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द ही अपनी नीतियों में बदलाव करेगी और किसानों के साथ खड़ा होना स्वीकार करेगी।