मुंबई में बच्चों को बंधक बनाने वाले आरोपी रोहित आर्य की कथित मुठभेड़ में मौत पर सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इस मामले में राहत देने का कोई आधार नहीं बनता। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी वापस ले ली।
मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने यह भी साफ किया कि याचिका को जनहित याचिका पीआईएल में तब्दील करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अदालत ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता चाहें, तो वे मजिस्ट्रेट कोर्ट में निजी शिकायत दर्ज करा सकती हैं, जैसा कि कानून में प्रावधान है। अदालत ने यह भी कहा कि एक ही मामले में कई मंचों पर शिकायत नहीं दी जा सकती।
याचिका के आरोप और दलीलें
यह याचिका मुंबई की अधिवक्ता शोभा बुद्धिवंत ने अधिवक्ता नितिन सत्वेते के माध्यम से दाखिल की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि रोहित आर्य की हत्या आत्मरक्षा के नाम पर एक राजनीतिक नेता के कहने पर की गई। याचिका में यह भी दावा किया गया कि आर्य महाराष्ट्र शिक्षा विभाग के लिए काम कर चुके थे और विभागीय बकाया न मिलने से वे मानसिक तनाव में थे।
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जब मामला अदालत में आया, तो पीठ ने पूछा कि याचिकाकर्ता ने सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाया, जबकि उन्हें पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत करनी चाहिए थी। अधिवक्ता सत्वेते ने बताया कि पुलिस को पहले लिखित शिकायत भेजी गई थी। अदालत ने जवाब में कहा कि यह एक नोटिस थी, औपचारिक शिकायत नहीं। कोर्ट ने साफ कहा कि शिकायत संबंधित पुलिस थाने में ही दी जानी चाहिए।
घटना की पृष्ठभूमि और जांच की स्थिति
30 अक्तूबर को मुंबई के पवई इलाके में 50 वर्षीय रोहित आर्य ने एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में 17 बच्चों और दो वयस्कों को बंधक बना लिया था। तीन घंटे तक चली इस घटना के दौरान पुलिस ने बचाव अभियान चलाया। इसी दौरान पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आर्य की गोली लगने से मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि आर्य ने एयर गन से फायर किया था, जिसके बाद जवाबी गोलीबारी में उसकी मौत हुई। मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच के पास है और मजिस्ट्रेट जांच भी चल रही है।