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रोहिंग्या पूछ रहे हैं, क्या है हमारी गलती, कौन देगा हमें पनाह

Tue, 12 Sep 2017 03:58 PM IST
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
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rohingyan - फोटो : rohingyan
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म्यांमार से रोहिंग्या मुस्लिमों का पलायन तेजी से हो रहा है। बांग्लादेश, भारत पाकिस्तान और बर्मा में रोहिंग्या की स्थिति ठीक नहीं पिछले कुछ महीनों से म्यांमार के रखाइन में रोहिंग्या मुसलमानों का पलायन, उनके घरों का जलाया जाना , गांव जलाए जाने की घटना और उन्हें म्यांमार से खदेड़े जाने की घटनाओं की आपबीती ने दुनिया को दहला दिया है। इस पलायन में सबसे बुरी स्थिति महिलाओं और बच्चों की है। 
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पढ़ें: तस्वीरेंः म्यांमार में हिंसा भड़कने से 18,500 रोहिंग्या मुस्लिम भागकर पहुंच रहे बांग्लादेश

ये मेरी जिंदगी का सबसे कठिन समय है

ताहिरा बेगम - फोटो : alzazira
ताहिरा बेगम- ताहिरा बदहवास सी बोले जा रही हैं,  ये मेरी जिंदगी का सबसे कठिन समय है। मैं जब अपने परिवार के साथ अपनी जान बचाने के लिए भाग रही थी तो मेरी गर्भावस्था का आखिरी समय चल रहा था। मैंने बॉर्डर के रास्ते में जंगल में अपने दूसरे बच्चे को जन्म दिया। जिंदगी हमसे क्या चाहती है, समझ नहीं आ रहा है। हमारा क्या होगा? हमारे बच्चों का क्या होगा?  हम कहां जाएं? हमारे लिए क्या कोई जगह है? 

मुझे मेरे बच्चों के सामने मारा जा रहा था

हलीमा - फोटो : alzazira
हलीमा- अपनी आंखों से निकलते हुए आंसू को पोंछने की नाकामयाब कोशिश कर रही हलीमा। हमें कौन शरण देगा?  म्यांमार वाले हमें वहां रहने नहीं दे रहे हैं और जब हम सभी भाग रहे हैं तो हमें दौड़ा-दौड़ा कर मारा जा रहा है। हम कहां जाएं? मुझे मेरे बच्चों के सामने मारा जा रहा था। हमने कई दिनों से खाना नहीं खाया है। मुझे नहीं पता हमारे साथ क्या होने वाला है। 

बच्चे भूख से बिलख रहे थे

सलमा खातून - फोटो : alzazira
सलमा खातून- मैं अपने पांच बच्चों और पति के साथ बस अपनी जान बचाकर भाग रही थी। भीड़ जहां जा रही थी हम सभी उधर जा रहे थे। घर जल रहे थे। गोलियों की आवाजें सुनाई दे रही थी। चारों ओर चीख पुकार मची थी। बच्चे भूख से बिलख रहे थे। हम सिर्फ चल रहे थे।  बच्चों और हमने दो दिनों तक कुछ नहीं खाया था। फिर कुछ लोगों ने हमें खाने को दिया जो हमने बच्चों के लिए रख लिया। हम तो थोड़े दिन बिना खाए पिए रह सकते हैं लेकिन बच्चों को खाना नहीं मिला तो क्या होगा?

मुझे नहीं पता मैं कहां जाउंगा

अयाज - फोटो : alzazira
मोहम्मद अयाज- तोलातुली गांव से परिवार के साथ भागा था, हमारे ऊपर बम और गोलियों की बरसात हो रही थी। इस गोलाबारी में  मैंने अपने परिवार के सभी सदस्यों को खो दिया है। मेरे परिवार वाले बांग्लादेशी बॉर्डर गार्डों की गोलियों के शिकार हो गए। बम की वजह से मुझे भी चोटे आईं हैं। मुझे नहीं पता मैं कहां जाउंगा। 
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 जो हो गया वो हो चुका है

अब्दुल खालेक - फोटो : alzazira
अब्दुल खालेक - हमें जिंदा भी रहना है और जिंदा रहने के लिए आपको बीती बातों को भुलाना ही होगा। आप हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकते की एक दिन सब ठीक हो जाएगा। बांग्लादेश के खुले मैदान में गड्ढा कर रहे अब्दुल खालेक परिवार का भरण पोषण कैसे करना है उसके बारे में कमर कस चुके हैं।  जो हो गया वो हो चुका है। 
 
 
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