मेघालय हाईकोर्ट ने सड़क निर्माण को लेकर एक अहम आदेश दिया। इसमें में कहा गया है कि यदि निर्माण पूर्ण होने के बाद निर्धारित अवधि में सड़क उखड़ती या खराब होती है तो राज्य सरकार उसे बनाने वाले ठेकेदार को जिम्मेदार माने। उसी ठेकेदार से उसकी मरम्मत कराई जाए।
मेघालय हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी और जस्टिस डब्ल्यू डेंगदोह की खंडपीठ ने यह आदेश दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि असल में राज्य सरकार को ठेकेदारों से यह गारंटी लेना होगी कि सड़क बनने के बाद तय अवधि में यदि वह खराब हुई तो वे जिम्मेदार होंगे। ठेकेदारों को खराब सड़क की रिपेयर करना होगी।
खंडपीठ ने यह आदेश एएच हजारिका द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर दिया। हजारिका ने पश्चिमी मेघालय में अगिया-मेंढीपारा-फुलबारी-तुरा (AMPT) सड़क के निर्माण और मरम्मत में देरी को लेकर
याचिका दायर की है। पीठ ने पीडब्ल्यूडी के सुपरवाइजिंग इंजीनियर को सड़क के निर्माण की देखरेख करने का भी निर्देश दिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ठेकेदार के लिए आवश्यक मानक बने रहें। निर्माण पूरा होने के तुरंत बाद सड़क की हालत खराब न हो।
राज्य सरकार ने रिपोर्ट में यह कहा
सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार द्वारा पेश रिपोर्ट में राज्य सरकार ने दावा किया कि निर्माण कार्य में पर्याप्त प्रगति हुई है। 41 किलोमीटर में से कम से कम 33 किलोमीटर का हिस्सा पूरा बन चुका है। बाकी के हिस्सों में काम जोरों पर है।
ठेकेदारों द्वारा किया गया काम घटिया
इस पर याचिकाकर्ता ने शिकायत की कि 41 किमी के शेष हिस्से पर काम छह अलग-अलग ठेकेदारों को दिया गया। ठेकेदारों द्वारा किया गया काम घटिया है। याचिकाकर्ता ने यह भी आशंका जताई कि कथित तौर पर काम पूरा होने के एक महीने के भीतर सड़क की ब्लैक-टॉपिंग उखड़ सकती है। केस की अगली सुनवाई 20 फरवरी 2023 को होगी।