वाणिज्य मंत्री ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही प्रोजेक्ट पूरा किया जाएगा। हालांकि, ओ ने निर्माण पूरा होने का समय नहीं बताया। उन्होंने कहा कि रखाइन के सितवे बंदरगाह का संचालन भी जल्द शुरू हो जाएगा। इससे दोनों देशों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी होगी, जिससे व्यापार आसान हो जाएगा।
म्यांमार के वाणिज्य मंत्री यू आंग नाइंग ओ मिजोरम दौरे पर हैं। यहां उन्होंने कहा कि रखाइन के रोहिंग्या विवाद के कारण कालाडन मल्टी मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (केएमटीटीपी) पर कोई असर नहीं होगा। प्रोजेक्ट के तहत म्यांमार के पलेटला और मिजोरम के जोरिनपुई के बीच रोड का निर्माण किया जा रहा है। ओ ने बताया कि रोड का निर्माण रखाइन के पश्चिमी क्षेत्र में हो रहा है। जबकि रोहिंग्या विवाद रखाइन के दूसरी तरफ है।
निर्माण पूरा होने का समय नहीं बताया
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वाणिज्य मंत्री ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही प्रोजेक्ट पूरा किया जाएगा। हालांकि, ओ ने निर्माण पूरा होने का समय नहीं बताया। उन्होंने कहा कि रखाइन के सितवे बंदरगाह का संचालन भी जल्द शुरू हो जाएगा। इससे दोनों देशों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी होगी, जिससे व्यापार आसान हो जाएगा। इससे सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर दबाव भी कम हो जाएगा। मार्च में विदेश राज्य मंत्री आरके रंजन सिंह ने बताया था कि पड़ोसी देश में अस्थिरता, राजनीतिक हलचल और रोहिंग्या विवाद के कारण प्रोजेक्ट में देरी हुई है।
रोड का 98 प्रतिशत काम पूरा
केएमटीटीपी परियोजना के तहत कोलकाता पोर्ट को सितवे पोर्ट से जोड़ा जाएगा। पलेटवा और जोरिनपुई के बीच 110 किलोमीटर लंबी रोड है। योजना में एक और रोड का प्रस्ताव है, 100 किलोमीटर रोड को नेशनल हाईवे से जोड़ा जाएगा। म्यांमार की ओर इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा हो गया है। रोड भी बन गया है। हालांकि, कुछ अस्थिरता के कारण प्रोजेक्ट में थोड़ी देरी जरूर हुई है। मिजोरम पीडब्लूडी विभाग ने अप्रैल में राज्यपाल हरिबाबू को बताया था कि 100 किलोमीटर की रोड में अब तक करीब 98.01 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। केंद्रीय नौवहन और बंदरगाह मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और म्यांमार के डिप्टी पीएम एडमिरल टीन ऑन्ग सैन ने नौ मई को सितवे बंदरगाह का उद्घाटन किया है। सितवे पोर्ट पहला कार्गो शिप 20 हजार बोरे सिमेंट के आए थे, जिनका वजन एक हजार मीट्रिक टन था।
जानिए, क्या है रोहिंग्या विवाद
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बांग्लादेश से आई मुस्लिम आबादी रखाइन में बसी थी। इसी आबादी को रोहिंग्या कहा जाता है। 1948 में म्यांमार आजाद हो गया। तब से बहुसंख्यक बौद्ध और मुस्लिम आबादी के बीच विवाद शुरू हो गया। रोहिंग्या की संख्या बढ़ती देख म्यांमार के जनरल विन की सरकार ने 1982 में देश में नया राष्ट्रीय कानून लागू किया। कानून में रोहिंग्या मुसलमानों का नागरिक दर्जा खत्म कर दिया गया। म्यांमार सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को देश छोड़ने के लिए मजबूर करती रही। तब से रोहिंग्या बांग्लादेश और भारत में घुसपैठ करके यहां आते रहे हैं। 2012 में रखाइन में सांप्रदायिक दंगे हुए। इसके बाद यहां से रोहिंग्या मुसलमानों का पलायन और बढ़ा। रखाइन में 2012 से ही सांप्रदायिक हिंसा जारी है। इस हिंसा में हजारों लोग मारे जा चुके हैं तो लाखों विस्थापित भी हुए हैं।