हैदराबाद स्थित डीआरडीएल ने एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट फुल स्केल कम्बस्टर का लंबी अवधि का ग्राउंड टेस्ट सफलतापूर्वक किया। इसमें लंबे समय तक इंजन को ठंडा रखने वाली तकनीक का प्रयोग किया गया है, जिससे इंजन पिघले बगैर लंबी उड़ान भर सके।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल) ने हाइपरसोनिक मिसाइल के विकास में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इस बात की जानकारी रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर के दी। मंत्रालय ने बताया कि डीआरडीएल ने एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट फुल स्केल कम्बस्टर का लंबी अवधि का ग्राउंड टेस्ट सफलतापूर्वक किया। इस टेस्ट में उपकरण ने 12 मिनट से अधिक लगातार काम किया, जो हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर है।
Defence Minister Office tweets, "Defence Research & Development Laboratory (DRDL), Hyderabad based laboratory of the DRDO has achieved a path-breaking milestone in the development of Hypersonic Missiles. DRDL successfully conducted an extensive long-duration ground test of its… pic.twitter.com/PTcp1iWUsz
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स्क्रैमजेट इंजन हवा को रैम की तरह दबाकर ईंधन जलाता है, जिससे मिसाइल या विमान को सुपरसोनिक गति से 5 गुना या उससे ज्यादा तेज उड़ान भरने की शक्ति मिलती है। इस टेक्नोलॉजी की मदद से भारत हाइपरसोनिक मिसाइल और अत्याधुनिक रक्षा हथियारों में अग्रणी बन रहा है।