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इस वजह से बढ़ता जा रहा है सुनामी का खतरा, दुनियाभर के देश खतरे में

Sun, 14 Oct 2018 01:30 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की प्राकृतिक आपदाओं पर एक रिपोर्ट आई थी। इसमें बताया गया था कि इन आपदाओं के कारण दुनियाभर के देशों को कितना नुकसान होता है। इन आपदाओं में सबसे ज्यादा थीं बाढ़ और सुनामी। हाल ही में इंडोनेशिया में भी देखा गया कि सुलावेसी द्वीप पर पहले भूकंप और बाद में आई सुनामी ने भारी तबाही मचाई। जिसके कारण 2 हजार लोगों की मौत हुई और लाखों लोग प्रभावित हुए। इसके बाद बाली द्वीप में भी भूकंप आया और सुनामी की चेतावनी जारी की गई।
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दो दशक से विनाश का सबब बन रही हैं सुनामी

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बीते दो दशकों से ये सुनामी विनाश का सबब बनती जा रही हैं। इस मामले में विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी आपदाएं और भी बढ़ सकती हैं। इसके लिए पहले से तैयारी करना काफी आवश्यक है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते जलस्तर के कारण सुनामी का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
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ग्लोबल वार्मिंग है कारण

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इसका मुख्य कारण है ग्लोबल वार्मिंग, जिससे तापमान बढ़ता है। जिसके कारण जलस्तर बढ़ता जा रहा है। इसमें थोड़ी सी वृद्धि भी सुनामी को न्योता दे सकती है। यह बात शोध से साबित हुई है। सुनामी से जापान में भी 16 हजार लोग मारे गए। जबकि हिंद महासागर में आई सुनामी के कारण सवा दो लाख लोगों की जान गई। जलवायु परिवर्तन में लगातार हो रहा परिवर्तन सुनामी के खतरे को बढ़ाता जा रहा है।

जलस्तर बढ़ने से आती है सुनामी

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अमेरिका के वर्जीनिया टेक संस्थान द्वारा की गई स्टडी के बारे में बताते हुए भूविज्ञान विभाग के प्रोफेसर ने बताया कि जलस्तर के बढ़ने का मतलब है सुनामी का आना। सुनामी चाहे छोटी हो या बड़ी उससे विनाश तो होता ही है।

उन्होंने बढ़ते जलस्तर के असर पर शोध किया। इंडोनेशिया के पालू में जो सुनामी आई है, उससे 50 साल बाद उसका परिणाम और भी घातक होगा। क्योंकि यह दुनिया का वो हिस्सा है जहां जलस्तर बढ़ता जा रहा है और जमीन नीचे धंसती जा रही है।
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जलस्तर और सुनामी ऐसे हैं संबंधित

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वैज्ञानिक काफी समय से विचार कर रहे हैं कि बढ़ते जलस्तर और सुनामी के बीच क्या संबंध हैं। इसमें यह बात भी पता चली है कि बढ़ते जलस्तर के बाद अगर तूफान आ जाए तो ऐसी परिस्थितियों में तटीय इलाके जलमग्न हो सकते हैं। इसमें सोलोमन आईलैंड जैसे निचले इलाके भी आते हैं।
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जलस्तर बढ़ने से यहां भी हो सकता है खतरा

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अभी तक चीन के मकाऊ के इलाके को सुनामी से सुरक्षित माना जाता था। लेकिन अब कहा जा रहा है कि अगक जलस्तर बढ़ा तो यह इलाका भी सुरक्षित नहीं रहेगा। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि अगर 1.5 से 2 मीटर ऊंची लहरें उठीं तो भारी बाढ़ भी आ सकती है।
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इसे कहते हैं सुनामी

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अक्सर माना जाता है कि सुनामी का मतलब तेज बहाव के साथ पानी का आना होता है जिससे संबंधित इलाका जलमग्न हो जाता है। अगर विस्तार से सुनामी के बारे में बात करें तो अचानक ऊंची लहरों के उठने को सुनामी कहा जाता है। जो तेज आवेग के साथ आगे बढ़ती हैं।

सुनामी एक जापानी शब्द है। इसमें सू का अर्थ है समुद्र तट और नामी का अर्थ है लहरें। इन लहरों के पीछे बहुत से कारण बताए जाते हैं। लेकिन भूकंप के कारण इसका असर सबसे असरदार होता है। भूकंप की वजह से समुद्र की ऊपरी परत अचानक से खिसककर आगे की ओर बढ़ती हैं, इससे समुद्र समांतर स्थिति से ऊपर की ओर बढ़ने लगता है।

फुकुशिमा से सबक

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साल 2011 में जापान के फुकुशिमा में तूफान और भीषण लहरों के कारण काफी नुकसान हुआ। इसकी चपेट में वहां का परमाणु संयंत्र भी आ गया। इसके पक्षधर इसे सुरक्षित और पर्यावरण सम्मत मानते थे। लेकिन 9 की तीव्रता वाले भूकंप के बाद सुनामी आई। सुनामी ने इन दावों को गलत साबित किया। इससे रिएक्टरों को भारी नुकसान पहुंचा और जापान को भारी परमाणु दुर्घटना झेलनी पड़ी।

जर्मनी ने लिया सबक

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जापान के फुकुशिमा की घटना से जर्मनी ने सबक लिया और परमाणु ऊर्जा को नकार दिया। जर्मनी ने सौर और पवन ऊर्जा में विकल्प के तौर पर निवेश करना शुरू किया। जर्मनी में कभी 20 परमाणु बिजली घर हुआ करते थे लेकिन अब 8 हैं। लेकिन आने वाले 6 सालों में उन्हें भी बंद कर दिया जाएगा।

जापान ने नहीं लिया सबक

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जापान में हुई घटना से जर्मनी ने तो सबक ले लिया लेकिन जापान ने नहीं लिया। घटना के बाद तो उसने परमाणु बिजली घरों को बंद कर दिया था लेकिन बाद में चालू कर लिया। इस बारे में फ्रांस और अमेरिका ने कभी विचार नहीं किया।

सरकार ने नहीं मानी बात

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हाल ही में भारत के तमिलनाडु राज्य के कुडनकुलम में भी रूस की सहायता से 2000 मेगावाट का परमाणु संयंत्र लगाया गया है। इसका स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों ने काफी विरोध किया। उन्होंने फुकुशिमा की दुर्घटना से सबक लेने को भी कहा लेकिन किसी की बात नहीं सुनी गई।
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