अध्ययन के अनुसार, समुद्री और स्थलीय आवासों में बढ़ते तापमान के लिए एक सामान्य जैविक प्रतिक्रिया यह है कि ध्रुव की सीमाओं की ओर मछली प्रजातियों की आबादी बढ़ रही है, क्योंकि वहां उनके लिए आवास के नए विकल्प के साथ अनुकूल वातावरण के द्वार खुल रहे हैं। वहीं, भूमध्य रेखा की ओर इनकी आबादी घट रही है, क्योंकि वहां परिस्थितियां बहुत गर्म हो रही हैं।
बढ़ता तापमान मछलियों के राजा अटलांटिक सैल्मन के लिए वरदान साबित हो रहा है। ध्रुवों के नजदीक रहने वाली ताजे या मीठे पानी की मछलियां भूमध्यरेखीय मछलियों से बेहतर स्थिति में हैं। इनमें मुख्य रूप से अटलांटिक सैल्मन जैसी बड़ी-बड़ी प्रवासी प्रजातियां तेजी से बढ़ रही हैं, क्योंकि तापमान बढ़ने से उनके लिए ध्रुव की ओर नए आवास खुल रहे हैं।
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यह जानकारी पनास नामक पत्रिका में प्रकाशित जलवायु के गर्म होने से बढ़ रही ताजे पानी की मछलियों की आबादी शीर्षक संबंधी अध्ययन में सामने आई है। अध्ययन के अनुसार, समुद्री और स्थलीय आवासों में बढ़ते तापमान के लिए एक सामान्य जैविक प्रतिक्रिया यह है कि ध्रुव की सीमाओं की ओर मछली प्रजातियों की आबादी बढ़ रही है, क्योंकि वहां उनके लिए आवास के नए विकल्प के साथ अनुकूल वातावरण के द्वार खुल रहे हैं। वहीं, भूमध्य रेखा की ओर इनकी आबादी घट रही है, क्योंकि वहां परिस्थितियां बहुत गर्म हो रही हैं। यह अध्ययन 10 हजार से ज्यादा समय शृंखलाओं के डाटासेट पर आधारित था और इसमें मछलियों की 600 से अधिक प्रजातियां शामिल थीं।
ताजे और खारे पानी में रहने के अनुकूल
अटलांटिक सैल्मन सैल्मोनिडे परिवार की रे-फिंड मछली है। यह साइबेरियन ताइमेन और पैसिफिक चिनूक सैल्मन के बाद सैल्मोनिडे की तीसरी सबसे बड़ी मछली है। इसे मछलियों का राजा भी कहा जाता है। यह उत्तरी अटलांटिक महासागर और उसमें बहने वाली नदियों में पाई जाती है। यह एक एनाड्रोमस मछली है, जिसका मतलब है कि यह ताजे और खारे पानी दोनों में रहती है। अटलांटिक सैल्मन बहुत तेज तैरती है और करीब 12 फीट ऊंची छलांग लगा सकती है। सैल्मन मादा की अधिकतम लंबाई 120 सेमी, नर की 150 सेमी और वजन चार से छह किलो होता है। ये मछलियां धाराओं और नदियों में अंडे देती हैं, लेकिन बढ़ने के साथ समुद्र में चली जाती है जहां वे परिपक्व होती हैं। इसके बाद वयस्क मौसम के अनुरूप अंडे देने के लिए फिर से ऊपर की ओर बढ़ते हैं।