ब्रिटेन में कोराना महामारी के दौरान उठाए गए कदमों को लेकर पूर्व सरकार पर कई आरोप लगे हैं। ऐसे में कोविड से निपटने की प्रक्रिया की जांच के लिए पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की व्हाट्सअप चैट और महामारी से संबंधित दस्तावेजों की मांग की गई थी। इस मांग को पूरा करने से ऋषि सुनक के प्रशासन ने साफ इनकार कर दिया है। ऐसे में आरोपों को छिपाने को लेकर एक कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है।
बता दें, सुनक की सरकार ने दस्तावेजों को सौंपने से इनकार तो किया ही है। साथ ही तर्क दिया कि कोरोना महामारी को अधिकारियों ने कैसे काबू किया इसकी जांच करना व्यर्थ है। इसका कोई मतलब ही नहीं बनता। हालांकि, विपक्षी नेताओं, कोविड पीड़ितों के परिवारों, डॉक्टरों और यहां तक कि उनकी सरकार कंजर्वेटिव पार्टी के कुछ सदस्यों ने भी उनसे आग्रह किया है कि इस मामले की जांच होने दें।
डिप्टी लेबर पार्टी की नेता एंजेला रेनेर ने कहा कि सुनक का दस्तावेज से इनकार करना सिर्फ कोविड से जुड़ी जांच को कमजोर करने का काम करता है। जनता सच्चाई जानना चाहती है न कि आपके खोखले दावे। सुनवाई से पहले सुनक ने संवाददाताओं से कहा कि वह सरकार की स्थिति में मजबूत थे।
जॉनसन ने की व्हाट्सएप संदेशों को सौंपने की पेशकश
वहीं, बोरिस जॉनसन ने जांच के लिए आज अपने सभी व्हाट्सएप संदेशों को सौंपने की पेशकश की है। जॉनसन ने हैलेट को लिखे पत्र में कहा, मैं सरकार की पॉजिशन को समझता हूं, मैं नहीं चाहता कि मेरा मैटरियल (व्हाट्सएप मैसेज) दूसरों के लिए एक टेस्ट केस बने। हालांकि मैं इसे देखने के लिए पूरी तरह से संतुष्ट हूं।
ब्रिटेन के कैबिनेट कार्यालय ने जोर देकर कहा है कि वह जांच को लेकर अपने दायित्वों के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। जांच समिति के पास ऐसी कोई अप्रासंगिक जानकारी मांगने की कोई शक्ति नहीं है, जो इस जांच से बाहर है।