भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के लड़ाकू श्वानों ने सेवा के दौरान शून्य त्रुटि के साथ विस्फोटकों को सूंघकर अनगिनत लोगों की जान बचाई है। अब इनमें से सेवानिवृत्त कई श्वान उपचाराधीन मरीजों की इलाज में मदद दे रहे हैं। आईटीबीपी इनका उपयोग ‘थैरेपी डॉग’ के तौर पर कर रहा है।
रेम्बो, पूजा, टॉम, रानी, मचली, हेलेन, रीना, निशा, टॉम और ग्रेवी उन 20 सेवानिवृत्त श्वान नायकों में से हैं, जिन्होंने थैरेपी डॉग के रूप में अपनी ‘दूसरी पारी’ शुरू की है। यह पिछले पांच महीनों से आईटीबीपी अस्पतालों में रोगियों को सहायता प्रदान कर रहे हैं। श्वानों से मरीजों को अस्पताल की उदासीनता में भावनात्मक सहारा मिलता है। ये श्वान अस्पताल के सामान्य मरीजों, लाइलाज बीमारियों के मरीजों, मानसिक रोगियों और विशेष जरूरत वालें बच्चों के बीच खुशी फैलाने के लिए बातचीत करते हैं।
आईटीबीपी के डीआईजी (पशु चिकित्सक) सुधाकर नटराजन ने कहा, राष्ट्र की सेवा करने वाले अपने रिटायर्ड नायकों की देखभाल के हम प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, चूंकि हमारे श्वान अत्यधिक प्रशिक्षित और सामाजिक हैं, इसलिए उनका उपयोग बच्चों में ऑटिज्म और अन्य वर्णक्रम संबंधी विकारों के प्रबंधन में सहायक चिकित्सा के रूप में किया जा रहा है। ये बच्चे श्वानों से सीधे भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं। यह शोध में साबित हो चुका है। श्वान से बातचीत डोपामिन स्तर को बढ़ाता है और तनाव के हार्मोन को कम करता है।
पंचकूला के पास बनाया गया है रिटायरमेंट होम
हरियाणा के पंचकूला के पास भानु में आईटीबीपी के श्वानों के लिए राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र (एनटीसीडी) में एक रिटायरमेंट होम भी स्थापित किया गया है। इस तरह की पहल के साथ आईटीबीपी भारत मे ऐसा पहला बल बन गया है जिसने सेवानिवृत्त श्वान नायकों के लिए एक बहुत ही उपयोगी भूमिका बनाई है। आईटीबीपी के महानिदेशक एसएस देसवाल ने कहा, ‘आईटीबीपी ने मरीजों और विशेष बच्चों को भावनात्मक समर्थन देने के लिए हमारे सेवानिवृत्त श्वानों की क्षमता को उजागर किया है।’
राशन व अन्य सुविधाओं के लिए गृह मंत्रालय ने स्वीकृत किया धन
देश को अपना सर्वश्रेष्ठ देने वाले इन श्वानों की देखभाल के लिए गृह मंत्रालय ने भी लगभग आधे से अधिक राशन और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार ने इनके लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में कार्यरत अन्य श्वानों की तरह राशि स्वीकृत की है। गृह मंत्रालय ने इन श्वानों को उनके मूल वेतन (राशन) का 70 प्रतिशत पेंशन (राशन) के लिए अधिकृत किया है। इस साल जून में आईटीबीपी ने गृह मंत्रालय को लिखे एक पत्र में ऐसे और सेवानिवृत्त श्वानों के आने की जानकारी दी है।