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सम्मान : सेवानिवृत्त जनरल कौल निर्मला देशपांडे स्मृति विश्व शांति पुरस्कार से सम्मानित, कश्मीर में निभाई थी अहम भूमिका

Mon, 02 May 2022 09:54 AM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कौल को ये सम्मान, उनके विभिन्न अतुलनीय प्रयासों और पड़ोसी मुल्कों जैसे पाकिस्तान के साथ शांति स्थापित करने तथा कोरोना काल में की गई मानवीय सेवाओं के लिए दिया गया। 
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Retired General Kaul honored with Nirmala Deshpande Memorial Global Peace Award - फोटो : self
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विस्तार
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सेवानिवृत्त जनरल तेज कौल को अखिल भारतीय रचनात्मक समिति (एबीआरएस) ने निर्मला देशपांडे स्मृति विश्व शांति पुरस्कार से सम्मानित किया है। जम्मू कश्मीर और पंजाब में आतंकवाद चरम पर रहने के दौरान जनरल कौल ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वाह किया। 

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दिल्ली में रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के उपाध्यक्ष और महाराष्ट्र के पूर्व विधायक मोहन जोशी ने की। जनरल तेज कौल को ये सम्मान, उनके विभिन्न अतुलनीय प्रयासों और पड़ोसी मुल्कों जैसे पाकिस्तान के साथ शांति स्थापित करने तथा कोरोना काल में की गई मानवीय सेवाओं के लिए दिया गया। कोरोना काल में पूर्व शीर्ष सैन्य अधिकारी कौल ने केंद्र शासित जम्मू और कश्मीर में 150 शिविरों तक सहायता पहुंचाने की जिम्मेदारी 2 अक्तूबर 2020 तक उठाई। 

जनरल कौल ने आर्मी हेडक्वार्टर्स में सहायक सैन्य सचिव, उप महानिदेशक सैन्य गुप्तचर और जनरल ऑफिसर कमांडिंग गुजरात और गोवा क्षेत्र के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी हैं।  जनरल कौल का नाम ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, चेन्नई से निकलने वाले पहले ऐसे अफसर के तौर पर दर्ज है, जिसे पीवीएसएम (परम विशिष्ट सेवा मेडल) प्राप्त है। उन्हें महामहिम राष्ट्रपति द्वारा अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम) से भी सम्मानित किया जा चुका है। कैलाश मठ, महाराष्ट्र ने उन्हें  मानवीय व सामजिक सेवाओं के लिए सरस्वती पुरस्कार से भी सम्मानित किया है। 
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जानिए कौन थीं निर्मला देशपांडे
अखिल भारतीय रचनात्मक समिति स्वर्गीय निर्मला देशपांडे द्वारा बनाया एक तरह का वैचारिक आंदोलन है। निर्मला देशपांडे ने 1952 में विनोबा भावे के भूदान आंदोलन शामिल होकर योगदान दिया और फिर महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के संदेश के साथ देश की करीब 40000 किलो मीटर की पैदल यात्रा की। उनका मानना था कि गांधीजी के सिद्धांत पूरी तरह से व्यवहार में लाना कठिन हैं, लेकिन सही मायने में एक लोकतांत्रिक समाज की स्थापना उसके बिना संभव नहीं है। निर्मला देशपांडे ही थीं, जिन्होंने कश्मीर और पंजाब में  आतंकवाद के चरम पर होते हुए भी शांति यात्राएं निकाली थीं।  उन्होंने 1994 में कश्मीर में शांति मिशन और 1996 में भारत-पाकिस्तान मीट आयोजित कराने में अहम योगदान दिया था। 

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