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लक्षद्वीप: प्रशासक को हटाने के लिए घरों के बाहर भूख हड़ताल, पानी में उतर कर प्रदर्शन

Mon, 07 Jun 2021 04:13 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कोच्चि

सार

केंद्र शासित लक्षद्वीप में प्रशासन की कथित जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन जोर पकड़ रहा है। सोमवार को द्वीप के लोगों ने अनूठी हड़ताल की। 
 
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सोमवार को लक्षद्वीप में भूख हड़ताल करते लोग - फोटो : ani
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विस्तार
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लक्षद्वीप के निवासियों ने कथित जनविरोधी कदम उठाने के मुद्दे पर प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पटेल को वापस बुलाने और एक मसौदा कानून को रद्द करने की मांग को लेकर सोमवार को पानी के भीतर विरोध प्रदर्शन किया। इसके अलावा अपने घरों के बाहर 12 घंटे की भूख हड़ताल की गई। 

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प्रदर्शनकारियों ने 'लक्षद्वीप फोरम बचाओ' के बैनर तले अरब सागर के भीतर और अपने घरों के बाहर 'एलडीएआर कानून वापस लो' तथा 'लक्षद्वीप के लिए न्याय' लिखी हुई तख्तियां प्रदर्शित की और सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा की।

शराब व गोमांस पर पाबंदी
लक्षद्वीप और केरल की विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि पटेल ने पशुओं के संरक्षण का हवाला देते हुए मुस्लिम बहुल द्वीपों पर शराब के सेवन से प्रतिबंध हटाने और गोमांस पर पाबंदी लगाने का निर्णय खुद ही ले लिया और तटरक्षक कानून के उल्लंघन का हवाला देकर तटीय इलाकों में बने मछुआरों के शेड तुड़वा दिए।
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भाजपा ने किया प्रशासक का बचाव
भाजपा ने प्रशासक पटेल का बचाव किया है और कहा है कि पटेल ने विकास कार्य करने और स्थानीय नेताओं के भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए यह निर्णय लिए इसलिए उनका विरोध किया जा रहा है। कोच्चि में केरल से यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के सांसदों ने विरोध प्रदर्शन के समर्थन में लक्षद्वीप प्रशासक कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार द्वारा लाए गए 'जनविरोधी' कानून को वापस लेने की मांग की।

प्रशासक लक्षद्वीप को केरल से अलग करना चाहते हैं : सईद
लक्षद्वीप से मुस्लिम लीग के पूर्व सांसद हमदुल्लाह सईद ने कहा, द्वीपवासियों ने आज शांतिपूर्वक प्रदर्शन किया। लगभग सभी प्रतिष्ठान, दुकानें और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान आज बंद रहे। द्वीप पर लगभग सभी ने प्रदर्शन में भाग लिया।

उन्होंने कहा कि लक्षद्वीप का केरल से हर मामले में नजदीकी संबंध है और प्रशासक द्वीप को राज्य से अलग करना चाहते हैं। राहुल गांधी, के. मुरलीधरन, के. सुधाकरन, कोडिकुन्नील सुरेश, शशि थरूर, अडूर प्रकाश और एन. के. प्रेमचंद्रन को छोड़कर केरल के लगभग सभी सांसदों ने प्रदर्शन में भाग लिया।

 
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