भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति का विवरण जारी किया है। विवरण जारी करते हुए रिजर्व बैंक ने चिंता जताई है। आरबीआई के चेयरमैन उर्जित पटेल ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। वहीं मंहगाई बढ़ने के संकेत दिए हैं। उत्पादन सेक्टर की सुस्ती रिजर्व बैंक को भी तंग कर रही है। वहीं देश के आर्थिक विकास के अनुमान में आरबीआई ने पहले की तुलना में कटौती की है।
बाजार के लिए अच्छी खबर नहीं
दिपावली का त्यौहार करीब है और आरबीआई द्वारा मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद की जाती है। आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर आरबीआई देश के दूसरे बैंकों को ब्याज पर पैसा देता है। यह पहले की तरह छह प्रतिशत की दर पर बरकरार है।
आरबीआई के इस कदम से साफ है कि केन्द्रीय बैंक के लोन देने की प्रक्रिया को लेकर बहुत उत्साहित नहीं है। इससे पहले केन्द्रीय बैंक ने देश के बैंक से दूर संचार क्षेत्र की कंपनियों को लोन देने में सावधानी बरतने के लिए कहा था। माना जा रहा है कि एनपीए (नॉन परफार्मिंग एसेट्स) के बढ़ रहे दबाव के कारण केन्द्रीय बैंक ने अपने हाथ बांध रखे हैं। इस तरह से बाजार में पैसा आने, खरीददारी बढ़ने और तरलता के कोई खास संकेत नहीं हैं।
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बढ़ेगी मंहगाई, घटेगा आर्थिक विकास
केन्द्रीय बैंक ने मंहगाई के बढ़ने का संकेत दिया है। इस संकेत के दो प्रमुख कारण हैं। एक तो यह कि देश का उत्पादन क्षेत्र अब भी सुस्त रफ्तार से चल रहा है। आर्थिक स्थिति को देखते हुए आरबीआई ने मंहगाई दर के 4.2-4.6 प्रतिशत तक रहने का अनुमान व्यक्त किया है। माना जा रहा है कि पेट्रोल, डीजल की बढ़ रही कीमतें भी देश में मंहगाई बढ़ाने में भूमिका निभाएंगी।
आर्थिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। केन्द्रीय बैंक ने अपने अनुमान में संशोधन किया है। 2017-18 के दौरान ग्रास वैल्यू ऐडेड ग्रोथ के 7.3 से घटकर 6.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। ग्रास वैल्यू ऐडेड ग्रोथ (जीवीएजी) वह वृद्धि दर है जिसमें उत्पादन से खपत के खर्च को घटाकर विकास का अनुमान व्यक्त किया जाता है।