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रिजर्व बैंक ने दिया महंगाई बढ़ने का संकेत

Thu, 05 Oct 2017 12:25 AM IST
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : WordPress
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति का विवरण जारी किया है। विवरण जारी करते हुए रिजर्व बैंक ने चिंता जताई है। आरबीआई के चेयरमैन उर्जित पटेल ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। वहीं मंहगाई बढ़ने के संकेत दिए हैं। उत्पादन सेक्टर की सुस्ती रिजर्व बैंक को भी तंग कर रही है। वहीं देश के आर्थिक विकास के अनुमान में आरबीआई ने पहले की तुलना में कटौती की है।
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बाजार के लिए अच्छी खबर नहीं
दिपावली का त्यौहार करीब है और आरबीआई द्वारा मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद की जाती है। आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर आरबीआई देश के दूसरे बैंकों को ब्याज पर पैसा देता है। यह पहले की तरह छह प्रतिशत की दर पर बरकरार है।

आरबीआई के इस कदम से साफ है कि केन्द्रीय बैंक के लोन देने की प्रक्रिया को लेकर बहुत उत्साहित नहीं है। इससे पहले केन्द्रीय बैंक ने देश के बैंक से दूर संचार क्षेत्र की कंपनियों को लोन देने में सावधानी बरतने के लिए कहा था। माना जा रहा है कि एनपीए (नॉन परफार्मिंग एसेट्स) के बढ़ रहे दबाव के कारण केन्द्रीय बैंक ने अपने हाथ बांध रखे हैं। इस तरह से बाजार में पैसा आने, खरीददारी बढ़ने और तरलता के कोई खास संकेत नहीं हैं।
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पढ़ें- RBI ने 6% पर बरकरार रखा रेपो रेट, विकास दर 6.7 फीसदी रहने का अनुमान

बढ़ेगी मंहगाई, घटेगा आर्थिक विकास
केन्द्रीय बैंक ने मंहगाई के बढ़ने का संकेत दिया है। इस संकेत के दो प्रमुख कारण हैं। एक तो यह कि देश का उत्पादन क्षेत्र अब भी सुस्त रफ्तार से चल रहा है। आर्थिक स्थिति को देखते हुए आरबीआई ने मंहगाई दर के 4.2-4.6 प्रतिशत तक रहने का अनुमान व्यक्त किया है। माना जा रहा है कि पेट्रोल, डीजल की बढ़ रही कीमतें भी देश में मंहगाई बढ़ाने में भूमिका निभाएंगी।

आर्थिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। केन्द्रीय बैंक ने अपने अनुमान में संशोधन किया है। 2017-18 के दौरान ग्रास वैल्यू ऐडेड ग्रोथ के 7.3 से घटकर 6.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। ग्रास वैल्यू ऐडेड ग्रोथ (जीवीएजी) वह वृद्धि दर है जिसमें उत्पादन से खपत के खर्च को घटाकर विकास का अनुमान व्यक्त किया जाता है।
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वित्त मंत्रालय ने लिया संज्ञान

वित्त मंत्रालय ने रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति की समीक्षा का संज्ञान लिया है। वित्त मंत्रालय ने जीवीएजी के अनुमान में कटौती को लेकर कहा है कि इससे उत्पादन के अंतर को बढ़ावा मिलेगा। दूसरे मुद्रास्फीति में वृद्धि को मंत्रालय ने मामूली संशोधन करार दिया है। वित्त मंत्रालय का कहना है कि इसके बाद भी साल की औसत मंहगाई दर चार प्रतिशत से भी कम पर बनी रहेगी।

एक तर्क यह भी वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद देश का उत्पादन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। एडिशनल सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी के अनुसार जीएसटी लागू होने के बाद उत्पादन क्षेत्र ने पुराने मॉल की खपत के लिए उत्पादन करीब-करीब बंद कर दिया था। ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर पुराने मॉल को खपाया जा सके और इसके बाद जीएसटी को केन्द्र में रखकर नये मूल्य पर सामान बाजार में भेजा जा सके।

मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि अब उत्पादन क्षेत्र की औद्योगिक ईकाइयां तेजी के प्रोडक्शन में लगी हैं। आने वाले दिनों में इसका बाजार पर असर देखने को मिलेगा। इसके बाद धीरे- धीरे सबकुछ सामान्य होता जाएगा।
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