आरबीआई के इस दिशा-निर्देश का मतलब एजेंटों के जरिये ग्राहकों को परेशान करना अब आसान नहीं होगा। आरबीआई ने कहा है कि ग्राहक को यह जानकारी रिकवरी एजेंट के उससे संपर्क में आने से पहले देना जरूरी होगा।
एप के जरिये कर्ज देने वाली कंपनियों के खिलाफ ग्राहकों की मिल रही शिकायतों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (एफएक्यू) के प्रारूप में नियम जारी कर दिया है। इसके 18 सवालों के जवाब जारी किए गए हैं। इसमें कहा गया कि अगर कोई ग्राहक लोन चुकाने में डिफॉल्ट करता है तो ग्राहकों को एजेंट के बारे में जरूरी जानकारी एसएमएस या ईमेल के जरिये पहले से देनी होगी।
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साथ ही अब ग्राहक को लोन देते वक्त ही कंपनी को एजेंट के बारे में जरूरी जानकारी देनी होगी। आरबीआई के इस दिशा-निर्देश का मतलब एजेंटों के जरिये ग्राहकों को परेशान करना अब आसान नहीं होगा। आरबीआई ने कहा है कि ग्राहक को यह जानकारी रिकवरी एजेंट के उससे संपर्क में आने से पहले देना जरूरी होगा। नए नियम के तहत सभी तरह के कर्ज वितरण और पुनर्भुगतान, लोन लेने वाले ग्राहक के बैंक अकाउंट और बैंक या एनबीएफसी के बीच होनी जरूरी होगा। इस लेन-देन में सेवा प्रदाता या किसी तीसरी पार्टी का कोई दूसरा अकाउंट शामिल नहीं होगा।
क्रेडिट कार्ड वाले ग्राहकों के लिए पहले से नियम तय
आरबीआई ने यह भी कहा है कि क्रेडिट कार्ड के जरिए किस्त चुकाने वाले ग्राहक इस नियम के दायरे में नहीं आएंगे। उसके लिए पहले से ही अलग नियम और शर्तें तय हैं। कर्ज देने वाले (एलएसपी ) के रूप में भी काम करने वाले पेमेंट एग्रीगेटर्स का इस्तेमाल कर्ज को चुकाने के लिए किया जा सकेगा।