नियुक्तियों और पदोन्नतियों में आरक्षण को लेकर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने एलान किया है कि वो सरकार के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाएगी। कांग्रेस ने कहा, पदोन्नति में आरक्षण को लेकर 'सुप्रीम कोर्ट में भाजपा सरकार के असंवैधानिक रुख' के खिलाफ पार्टी 16 फरवरी से पहले देशव्यापी आंदोलन कार्यक्रम शुरू करेगी। इसी मामले को लेकर आज संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने नियुक्तियों और पदोन्नतियों में आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर सोमवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है और आरोप लगाया कि भाजपा आरक्षण को खत्म करने की कोशिश में है।
प्रियंका ने ट्वीट किया, भाजपा का आरक्षण खत्म करने का तरीका समझिए। आरएसएस वाले लगातार आरक्षण के खिलाफ बयान देते हैं। उत्तराखंड की भाजपा सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील डालती है कि आरक्षण के मौलिक अधिकार को खत्म किया जाए। उत्तर प्रदेश सरकार भी तुरंत आरक्षण के नियमों से छेड़छाड़ शुरू कर देती है।
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार के मंत्रियों में से एक ने यह कहकर सदन को गुमराह किया है कि यह स्थिति 2012 सरकार की वजह से आई है। हम निश्चित रूप से मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार के प्रस्ताव को आगे बढ़ाएंगे।
नियुक्तियों और पदोन्नतियों में आरक्षण पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारें नियुक्तियों में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है तथा पदोन्नति में आरक्षण का दावा कोई मौलिक अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा, इस न्यायालय द्वारा निर्धारित कानून के मद्देनजर इसमें कोई शक नहीं है कि राज्य सरकारें आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है। ऐसा कोई मौलिक अधिकार नहीं है जिसके तहत कोई व्यक्ति पदोन्नति में आरक्षण का दावा करे।
उत्तराखंड सरकार के पांच सितम्बर 2012 के फैसले को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष न्यायालय ने यह टिप्पणी की। गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार ने राज्य में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को आरक्षण उपलब्ध कराए बगैर सार्वजनिक सेवाओं में सभी पदों को भर्ती किए जाने का फैसला लिया था।