बहुजन समाज पार्टी नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने को सवर्णों के साथ फ्रॉड बताया है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस बिल को लाकर समझ रही है कि उसने छक्का मार दिया है, लेकिन उसे यह नहीं मालूम है कि उसका यह छक्का बाउंड्री पर कैच कर लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि असलियत यह है कि भाजपा ने सवर्णों के लिए आरक्षण नहीं दिया है, बल्कि राज्यों के लिए यह रास्ता खोल दिया है कि वे अपने यहां सवर्णों को आर्थिक आधार पर आरक्षण दे सकें। मिश्रा ने कहा कि संविधान में 50 फीसदी आरक्षण से अधिक का प्रावधान नहीं है।
इसके बाद भी सरकार यह आरक्षण का प्रस्ताव किया है। इसके कारण न्यायिक समीक्षा में यह बिल सुप्रीम कोर्ट में फेल हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को 50 फीसदी की सीमा को खोलने के लिए बिल लेकर आना चाहिए था। उन्होंने अल्पसंख्यकों के लिए भी आरक्षण देने की मांग की।
सपा-बसपा के गठबंधन के डर से आया कानून
बिना प्रधानमंत्री का नाम लिए बसपा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि इस बिल के बारे में किसी वरिष्ठ मंत्री तक को जानकारी नहीं दी गई थी। लेकिन इस कानून को लाने के पीछे दो राष्ट्रीय नेताओं के आपस में मिलने से भाजपा में पैदा हुआ डर था। उनका इशारा था कि अखिलेश यादव और मायावती के बीच राजनीतिक समझौते की संभावना से डरकर भाजपा ने अपने वोटबैंक को बनाने के लिए यह कानून आनन-फानन में लाया।
उन्होंने कहा कि सरकार के पास लाख नौकरियां भी नहीं हैं, लेकिन हर मंच से करोड़ों सवर्णों के लिए आरक्षण देने की बात कही जा रही है। सरकार को बताना चाहिए कि वह करोड़ों लोगों को नौकरियां कैसे देगी। उन्होंने कहा कि सरकार हर पीएसयू को प्राइवेट हाथों में देती जा रही है, सरकारी नौकरियां खत्म होती जा रही हैं। ऐसे में वह इस 10 फीसदी आरक्षण में सभी सवर्णों को नौकरी कैसे उपलब्ध कराएगी।
उन्होंने महादलित नेता रामविलास पासवान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्होंने अपने विभागों में आरक्षित वर्गों के लिए जो नौकरियां रिक्त पड़ी हुई हैं, उनकी भर्ती के लिए कोई प्रयास नहीं किया।