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IIS: आईआईएस के शोधकर्ताओं ने तैयार किया अल्ट्रा माइक्रो सुपरकैपेसिटर, महंगी बैटरियों से मिलेगी आजादी

Sun, 02 Apr 2023 06:38 AM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

बंगलुरू स्थित आईआईएससी के इंस्ट्रूमेंटेशन और अनुप्रयुक्त भौतिकी विभाग (आईएपी) की प्रोफेसर आभा मिश्रा ने बताया कि अल्ट्रा-माइक्रो सुपरकैपेसिटर मौजूदा सुपरकैपेसिटर की तुलना में बहुत छोटा और अधिक सक्षम है।
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बैटरी सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएस) के शोधकर्ताओं ने एक अल्ट्रा माइक्रो सुपरकैपेसिटर तैयार किया है। यह महंगी, बड़ी और जल्दी खराब होने वाली बैटरियों से आजादी दिलाने का जरिया बन सकता है। इसे बनाने वाले विज्ञानियों का दावा है कि यह मोबाइल से लेकर इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) में इस्तेमाल किया जा सकता है। 
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बंगलुरू स्थित आईआईएससी के इंस्ट्रूमेंटेशन और अनुप्रयुक्त भौतिकी विभाग (आईएपी) की प्रोफेसर आभा मिश्रा ने बताया कि अल्ट्रा-माइक्रो सुपरकैपेसिटर मौजूदा सुपरकैपेसिटर की तुलना में बहुत छोटा और अधिक सक्षम है। इसे बैटरी से चलने वाले किसी भी उपकरण के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। कैपिसिटर बिना किसी क्षय के लंबे समय तक विद्युत आवेश संरक्षित करने में सक्षम होते हैं। एजेंसी

दशकों तक काम करने की रखते हैं क्षमता
प्रो. मिश्रा ने बताया कि जैसे एक पांच वोल्ट की बैटरी अगर दो वर्ष तक पांच वोल्ट पर संचालति होती रहेगी, लेकिन इसके बाद इसकी क्षमता में कमी आती जाएगी, लेकिन कैपेसिटर  पांच वोल्ट की क्षमता के साथ दशकों तक काम करते रहेंगे।  हालांकि, ये बैटरियों की तरह लंबे समय तक लगातार विद्युत आवेश मुहैया नहीं करा सकते। दूसरी तरफ सुपरकैपेसिटर बैटरी और कैपिसिटर दोनों की खूबियां रखते हैं।अल्ट्रा माइक्रो सुपरकैपेसिटर बेहद छोटे आकार का होने के बाद भी बड़ी मात्रा में लंबे समय तक विद्युत आवेश संरक्षित करने में सक्षम है। ये असल में  बैटरी और सुपरकैपेसिटर दोनों की खूबियों का उन्नत संस्करण है।
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पेटेंट के बाद होगा व्यावसायिक उत्पादन
शोधकर्ता यह पता लगाने की योजना बना रहे हैं कि मोलिब्डेनम डाइसल्फाइड को अन्य सामग्रियों के साथ बदलने से सुपरकैपेसिटर की धारिता और अधिक कैसे बढ़ सकती है। प्रो. मिश्रा का दावा है कि उनका सुपरकैपेसिटर पूरी तरह कार्यात्मक है और इसे इलेक्ट्रिक कार या किसी भी बैटरी से चलने वाले उपकरण में इस्तेमाल किया जा सकता है। फिलहाल, अल्ट्रा माइक्रो सुपरकैपेसिटर के पेटेंट का आवेदन किया गया है। पेटेंट हासिल होने के बाद इसके व्यावसायिक उत्पादन के लिए समझौतों पर विचार किया जाएगा।

3,000 फीसदी ज्यादा क्षमता 
सुपरकैपेसिटर के निर्माण के बाद शोधकर्ताओं ने विभिन्न वोल्टेज लगाकर डिवाइस की इलेक्ट्रोकेमिकल कैपेसिटेंस या चार्ज-होल्डिंग क्षमता को मापा। इस दौरान उन्होंने पाया कि कुछ शर्तों के साथ इसकी विद्युत धारिता में 3,000 फीसदी की वृद्धि हुई। आईएपी में पीएचडी छात्र और शेध के प्रमुख लेखकों में से एक विनोद पंवार ने बताया कि अल्ट्रा माइक्रो सुपरकैपेसिटर इतने छोटे होते हैं कि इन्हें माइक्रोस्कोप के बिना नहीं देखा जा सकता है।
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