भारतीय टेक्टोनिक प्लेट पृथ्वी के आवरण में जाकर दो हिस्सों में टूट रही है। इसकी वजह से हिमालय क्षेत्र के आसपास लगातार अधिक तीव्रता वाले भूकंपों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इस गतिविधि के कारण हिमालय की ऊंचाई भी बढ़ रही है। यहां तक की इससे तिब्बत भी दो हिस्सों में टूट सकता है।
अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत किए गए शोध के मुताबिक, दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत के नीचे का भूविज्ञान पहले की तुलना में और भी जटिल हो सकता है। हिमालय का निर्माण भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट के टकराव से हुआ था। वैज्ञानिकों के नए विश्लेषण में यह बात सामने आई है।
वैज्ञानिकों का है यह कहना
वैज्ञानिकों ने बताया कि जहां कुछ स्थानों पर भारतीय प्लेट का निचला हिस्सा 200 किमी गहरा है, वहीं कुछ जगहों पर यह सिर्फ 100 किमी गहरा है। इससे पता चलता है कि भारतीय प्लेट के कुछ हिस्से में दरारें आ गई हैं। साल 2022 में शोधकर्ताओं ने हिमालय में दो प्लेटों के मिलने की सीमा का पता लगाने के लिए क्षेत्र में भूतापीय झरनों से हीलियम बुलबुले में भिन्नता का मानचित्रण किया। उन्होंने कहा कि इसका असर धरती के केंद्र (कोर) तक जाएगा।
टेक्टोनिक प्लेट्स होती क्या हैं?
पृथ्वी का बाहरी आवरण बड़े-बड़े टुकड़ों से बना होता है, जिसे टेक्टोनिक प्लेट कहा जाता है। ये प्लेट ठोस चट्टान का एक विशाल, स्लैब होता है। टेक्टोनिक प्लेट्स को लिथोस्फेरिक प्लेट भी कहते हैं, ये प्लेटें आपस में एक साथ फिट होती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि ये एक जगह पर ही अटकी होती हैं। दरअसल, ये पृथ्वी के मेंटल (Mantle) पर तैरती रहती हैं। मेंटल पृथ्वी के क्रस्ट और कोर के बीच की परत होती है।