पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू
- फोटो : एएनआई (फाइल)
भारत सरकार ने 2024 के लिए कुल 132 पद्म पुरस्कारों का एलान कर दिया है। इस साल कुल 110 पद्मश्री, 17 पद्म भूषण और पांच पद्म विभूषण देने की घोषणा की गई है। जिन लोगों ये पुरस्कार मिलेंगे वो सब अपने-अपने क्षेत्रों में वर्षों से सेवा कर रहे थे। सार्वजनिक मामलों के लिए देश के पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू को पद्म विभूषण देने का एलान कर दिया है। आइये जानते हैं वेंकैया नायडू के बारे में...
आंध्र प्रदेश के छोटे से गांव में हुआ था जन्म
मुप्पावारापु वेंकैया नायडू का जन्म 1 जुलाई, 1949 को आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव चावाटापलेम में हुआ था। उनके पिता का नाम रंगैया नायडू जबकि माता का नाम रामानाम्मा है। नेल्लौर केवीआर. कॉलेज से स्नातक करने के बाद उन्होंने विशाखापत्तनम के आंध्र विश्वविद्यालय से विधि में स्नातक की डिग्री हासिल की। अप्रैल 1971 में उषा से विवाह हुआ। और उनकी एक बेटी और बेटा है।
छात्र नेता के तौर पर राजनीति की शुरुआत की
एक छात्र नेता के तौर पर नायडू ने अपनी राजनीति शुरू की। कॉलेज के दिनों से ही वेंकैया नायडू किसानों और समाज के दबे-कुचले वर्ग के मुद्दों को लेकर काफी मुखर रहे। वेंकैया बेहद प्रभावशाली नेता और वक्ता माने जाते हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार और अत्याचार खिलाफ काफी मुखरता के साथ मुद्दे उठाएं। वह आपातकाल के दौर में कई दिनों तक जेल में रहे। इसके अलावा वह बेहद स्पष्ट लेखक भी हैं। उन्होंने कई अखबारों और पत्रिकाओं के लिए लेखन का कार्य किया।
आंध्र प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने राज्य में कई ग्रामीण इलाकों में जमीनी स्तर से पार्टी के नेतृत्व को मजबूत करने का कार्य किया है। बतौर भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को आगे बढ़ाने का कार्य किया। अपने तीन दशक के सार्वजनिक जीवन में नायडू ने कई पदों पर रहकर देश की सेवा की है।
पूर्व राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू का राजनैतिक जीवन
- शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक के रूप में हुई।
- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में रहे और कॉलेज यूनियन के अध्यक्ष बने।
- 1972 में जय आंध्रा आंदोलन से नेता के रूप में मशहूर हुए।
- 1974 में जयप्रकाश नारायण की छात्र संघर्ष समिति में आंध्र प्रदेश के संयोजक बने। इमरजेंसी का विरोध करने के लिए 1977-80 तक जेल में रहे।
- महज 29 साल की उम्र में 1978 में पहली बार विधायक बने।
- 1983 में भी विधानसभा पहुंचे और धीरे-धीरे राज्य में भाजपा के सबसे बड़े नेता बनकर उभरे।
- 1998 में पहली बार कर्नाटक से राज्यसभा के लिए चुने गए। उसके बाद 2004 और 2010 में भी उसी राज्य से सदन पहुंचे। चौथी बार 2016 में इस सदन के लिए उन्हें राजस्थान से चुना गया।
- 1996-2000 तक पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे। इस दौरान उनकी हिंदी पर मास्टरी और प्रेस कांफ्रेंस में उनके चुटीले अंदाज ने उन्हें राष्ट्रीय मीडिया का प्रिय बना दिया। इसी खूबी के कारण वे दक्षिण के एकमात्र नेता हैं जिनकी उत्तर भारत की रैलियों में भी भारी भीड़ जुटती है।
- 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री रहे।
- 2002 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। 2004 में तीन साल के लिए फिर यह कुर्सी मिली लेकिन उसी साल आम चुनाव में पार्टी की हार के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
- 2014 के आम चुनाव में पार्टी की जीत के बाद केंद्र में शहरी विकास मंत्री बने।
- अगस्त, 2017 से अगस्त 2022 तक देश के उपराष्ट्रपति रहे।