अध्ययन के नतीजे ओपन एक्सेस जर्नल बीएमजे ओपन में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, इन एनर्जी ड्रिंक्स में आमतौर पर प्रति लीटर करीब 150 मिलीग्राम कैफीन होता है। साथ ही इसमें चीनी, विटामिन, खनिज और अमीनो एसिड भी अलग-अलग मात्रा में होते हैं।
लोकप्रिय पेय पदार्थों में शुमार एनर्जी ड्रिंक युवाओं की नींद उड़ा रही हैं। साथ ही अनिद्रा की समस्या भी पैदा कर रहा है। हाल में हुए अध्ययन में जो युवा महीने में केवल एक से तीन बार एनर्जी ड्रिंक का सेवन करते हैं, उनमें भी नींद से जुड़ी समस्याओं में इजाफा देखा गया। अध्ययन के नतीजे ओपन एक्सेस जर्नल बीएमजे ओपन में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, इन एनर्जी ड्रिंक्स में आमतौर पर प्रति लीटर करीब 150 मिलीग्राम कैफीन होता है। साथ ही इसमें चीनी, विटामिन, खनिज और अमीनो एसिड भी अलग-अलग मात्रा में होते हैं।
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इन ड्रिंक्स को ऐसे दर्शाया जाता है कि यह मानसिक और शारीरिक शक्ति को बढ़ा सकते हैं। जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का तर्क है कि इन्हें एनर्जी ड्रिंक्स बताना भ्रामक है क्योंकि चीनी को छोड़कर अन्य तत्व ऊर्जा प्रदान नहीं करते। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट ने भी अपने अध्ययन में खुलासा किया है कि एनर्जी ड्रिंक्स में अतिरिक्त कैफीन होता है। भारत की शीर्ष खाद्य नियामक संस्था-भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) इन एनर्जी ड्रिंक्स को गैर-अल्कोहल युक्त पेय पदार्थों के रूप में परिभाषित करती है। हालांकि, इनमें कैफीन, ग्वाराना, टॉरिन और जिनसेंग जैसे उत्तेजक पदार्थ होते हैं।
जितना ज्यादा सेवन, उतनी अधिक समस्याएं
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने नॉर्वे के 18 से 35 वर्ष की आयु के 53,266 युवाओं के आंकड़ों की समीक्षा की। जो छात्र और छात्राएं प्रतिदिन एनर्जी ड्रिंक पीते थे वे उन लोगों की तुलना में करीब एक घंटे कम सोते थे जो कभी-कभार या बिल्कुल भी नहीं पीते थे। इसका प्रभाव इस बात में भी देखा गया कि वे रात में कितनी बार जगे और उन्हें सोने में कितना समय लगा। जैसे-जैसे उन्होंने एनर्जी ड्रिंक की मात्रा बढ़ाई उनके रात में सोने और जागने का समय बढ़ गया। इसका सीधा सा तात्पर्य यह है कि उनकी नींद में लगातार खलल पड़ा। इसी तरह जो लड़के प्रति दिन एनर्जी ड्रिंक पीते थे उनके हर रात छह घंटे से भी कम सोने की संभावना उनकी तुलना में दोगुनी से भी अधिक थी, जो कभी-कभार इनका सेवन करते थे।