भारत की जेनेटिक इंजीनियरिंग ऑपरेशन कमेटी (जीईएसी) ने जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) सरसों की नई किस्म डीएमएच11 को फील्ड परीक्षण के लिए जारी किया है। इसके तहत व्यावसायिक रिलीज के पहले किसानों द्वारा बीज उत्पादन करना होगा।
सुरक्षा और असर का भी अध्ययन
नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेस के वैज्ञानिक के विजय राघवन ने बताया कि बार्नेस और बारस्टार आधारित हाइब्रिड राई का इस्तेमाल कनाडा में 1996, अमेरिका में 2002 और ऑस्ट्रेलिया में 2007 से हो रहा है। अकेले कनाडा ने 2013 में 70 लाख टन राई और इसका बना 23 लाख टन तेल का निर्यात किया। किसी पर दुष्प्रभाव की बात 1996 से अब तक सामने नहीं आई है। वहीं, भारत में भी डीएमएच11 से मनुष्य में एलर्जी, जहर पहुंचने या पर्यावरण को नुकसान के आकलन के लिए विस्तृत परीक्षण किए गए।
सरकार को फायदा
भारत ने 2021-22 में खाद्य तेल के आयात पर 1,899 करोड डॉलर खर्च किए थे। जीई सरसों से उत्पादन बढ़ाकर यह खर्च कम किया जा सकता है।
भारत में स्थिति
भारत ने इससे पहले जीएम बैंगन को व्यवसायिक उत्पादन के लिए जारी किया लेकिन पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इसे खेती और फसलों के लिए नुकसानदायक बताते हुए हुए रुकवा दिया। इस समय केवल जीएम तकनीक से विकसित कपास को ही अनुमति दी गई है।
भारतीय किसान संघ खफा, कहा- बिना वैज्ञानिक आधार के सिफारिश
जीन संवर्धित अभियांत्रिकी मूल्यांकन समिति (जीईएसी) की सिफारिश का विरोध शुरू हो गया है। किसान संगठनों के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ ने इसे आत्मघाती बताते हुए सरकार से सिफारिश खारिज करने की मांग की है।
किसान संघ के महासचिव मोहिनीमोहन मिश्रा ने कहा, जीईएसी ने जीएम सरसों की गुणवत्ता और इसका पर्यावरण पर पड़ने वाले असर का कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं किया है। जरूरी वैज्ञानिक समीक्षा के अभाव में हड़बड़ी में यह सिफारिश की गई है। मिश्रा ने कहा, जीईएसी का यह फैसला अस्वीकार्य है। जरूरत पड़ने पर इस फैसले के खिलाफ आंदोलन करेंगे।