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Republic Day: भारत-चीन सीमा पर तवांग के आखिरी गांव में मना गणतंत्र दिवस, जिमिथांग को क्यों कहते हैं 'पांगचेन'

Thu, 26 Jan 2023 07:38 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Republic Day: आईटीबीपी कमांडेंट डॉ. दीपक कुमार पाण्डेय ने स्थानीय जनता को भारत सरकार द्वारा शुरू किये गये आजादी का अमृत महोत्सव एवं जीवंत ग्राम कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी...
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जिमिथांग में भव्य समारोह - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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गणतंत्र दिवस के अवसर पर, आईटीबीपी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत बहुमुखी विकास के लिए पायलट वाइब्रेंट गांव जिमिथांग में भव्य समारोह आयोजित किया गया। यह गांव, अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन बॉर्डर पर स्थित तवांग क्षेत्र का आखिरी गांव है। गुरुवार को स्थानीय प्रशासन, धार्मिक नेताओं, गांव के बुजुर्गों, समाज के सम्मानित सदस्यों, महिलाओं और छात्रों की भारी भागीदारी के बीच आईटीबीपी कमांडेंट डॉ. दीपक कुमार पांडेय ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया।

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जिमिथांग में भव्य समारोह में शामिल गांव वाले - फोटो : Amar Ujala

गणतंत्र दिवस के भव्य कार्यक्रम की शुरुआत ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों की याद में बनाए गए युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। डॉ. दीपक कुमार पाण्डेय ने स्थानीय जनता को भारत सरकार द्वारा शुरू किये गये आजादी का अमृत महोत्सव एवं जीवंत ग्राम कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आईटीबीपी, अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा और स्थानीय आबादी के विकास को सुनिश्चित करने के लिए दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों में कई विकास कार्यक्रम भी आयोजित करती है।

जिमिथांग में भव्य समारोह में शामिल होते स्कूली बच्चे - फोटो : Amar Ujala

क्षेत्र में सड़कों के निर्माण के अलावा, पीने के पानी की सुविधा प्रदान करने, स्कूल भवनों का निर्माण, स्कूलों को गोद लेने, वृक्षारोपण अभियान, खेल प्रतियोगिताओं, चिकित्सा शिविरों और पशु चिकित्सा शिविरों सहित कई स्वच्छता और स्वच्छता पहल की गई है। जीवंत गांव कार्यक्रम के तहत भारत सरकार, अरुणाचल प्रदेश सरकार के समन्वय से ज़िमिथांग गांव के लिए कई विकास कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इससे गांव की स्थानीय आबादी के लिए रोज़गार के कई अवसर उपलब्ध होंगे। क्षेत्र के युवाओं के लाभ के लिए कई कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने का भी प्रयास होगा।

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जिमिथांग में भव्य समारोह में शामिल होते स्कूली बच्चे - फोटो : Amar Ujala

ज़िमिथांग, तवांग क्षेत्र का सबसे दूरस्थ गांव है। यह अंतर्राष्ट्रीय सीमा की ओर अंतिम गांव है। इसे पवित्र स्थान माना गया है। ऐसा भी कहा जाता है कि यह गुरु पदमसंभव का कार्यक्षेत्र रहा है। इस वजह से यह स्थान इतना पवित्र है कि इसे 'पांगचेन' भी कहा जाता है। मोम्पा जनजाति की बोली में पांगचेन शब्द का अर्थ है 'ऐसा व्यक्ति जो सभी पापों से मुक्त हो'। इलाके से होकर बहने वाली न्यामजंग चू नदी इस गांव को और भी खूबसूरत और पवित्र बनाती है। इसी गांव के निकट गोरसाम स्तूप है, जो करीब 800 साल पुराना है। इस गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और आईटीबीपी कर्मियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के बाद आईटीबीपी द्वारा सभी ग्रामीणों के लिए बड़ा खाना आयोजित किया गया।

आईटीबीपी उच्च हिमालयी सीमा की बर्फीली ऊंचाई पर तैनात है, जहां तापमान माइनस 45 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। यह बल लगभग 3,488 किलोमीटर की राष्ट्रीय सीमा की रखवाली कर रहा है। बर्फ से ढके हिमालय में तैनात होने के कारण आईटीबीपी के जवानों को प्यार से हिमवीर (हिम योद्धा) कहा जाता है। हाल ही में आईटीबीपी की 55वीं बटालियन ने जिला शिक्षा विभाग के सहयोग से सैकड़ों स्थानीय छात्रों के लिए 'सीमा दर्शन' कार्यक्रम का आयोजन किया है। स्थानीय जनता और बच्चों को विभिन्न प्रकार के चिकित्सा उपकरणों, बल में इस्तेमाल किए जा रहे विभिन्न हथियारों और आत्मरक्षा उपायों पर छोटे मॉड्यूल के बारे में शिक्षित किया गया है।

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