कांग्रेस ने शुक्रवार को चुनाव आयोग की 'खराब' वीवीपीएटी मशीनों की पहचान करने वाली रिपोर्ट को 'सबसे गंभीर' करार दिया। साथ ही चुनाव निकाय को चुनावी प्रक्रिया की अखंडता में जनता के विश्वास को बनाए रखने में मदद करने के लिए सभी को विश्वास में लेने की सलाह दी। विपक्षी दल ने चुनाव आयोग से कई सवाल किए और कहा कि चुनाव प्रक्रिया में विश्वास बहाल करने में मदद के लिए वीवीपीएटी (VVPAT) पर पूरी पारदर्शिता के साथ जवाब देना चाहिए।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों से पता चला है कि चुनाव आयोग ने कथित तौर पर 6.5 लाख वीवीपीएटी मशीनों को दोषपूर्ण के रूप में पहचाना है और उन्हें मरम्मत के लिए निर्माताओं को भेज दिया है। उन्होंने कहा कि ये वीवीपीएटी मशीनें नवीनतम 'एम3' प्रकार की हैं, जिन्हें पहली बार 2018 में चुनाव आयोग द्वारा पेश किया गया था और तब से चुनावों में उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 17.4 लाख वीवीपीएटी मशीनों को 2019 के लोकसभा चुनावों में उपयोग के लिए अधिसूचित किया गया था।
हालांकि, वीवीपीएटी में खराबी के बारे में मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग ने कहा है कि मरम्मत के लिए 3.43 लाख वीवीपैट की पहचान की गई थी, न कि 6.5 लाख की, जैसा कि मीडिया में रिपोर्ट किया गया है। चुनाव अधिकारियों ने कहा है कि दोषपूर्ण वीवीपीएटी किसी भी तरह से गलत परिणाम नहीं देता है, यह केवल चुनाव प्रक्रिया के दौरान कामकाज को रोकने का संकेत देता है।
खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस इसे चुनावी प्रक्रिया की अखंडता को प्रभावित करने वाला एक "सबसे गंभीर मुद्दा" मान रही है, क्योंकि जिन मशीनों में खामियां पाई गई हैं, उनकी संख्या कथित रूप से 2019 के लोकसभा चुनाव में इस्तेमाल की गई संख्या के एक तिहाई (37 प्रतिशत) से अधिक है। उन्होंने कहा, "2019 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में मतदाताओं के वोट प्रभावित हो सकते हैं। ईवीएम में जनता के विश्वास को बढ़ाने के उपाय के रूप में वीवीपैट की शुरुआत की गई थी। ईवीएम पर बढ़ते सवालों के माहौल में इतने बड़े पैमाने पर त्रुटि को चुनावी प्रक्रिया में जनता के विश्वास को बहाल करने के लिए पूरी पारदर्शिता की आवश्यकता है।"
यह देखते हुए कि इसे एक अलग घटना के रूप में नहीं माना जा सकता है। कांग्रेस नेता ने कहा कि खामियां इतनी "गंभीर" हैं कि चुनाव आयोग की अपनी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के उल्लंघन में मशीनों को निर्माताओं को वापस करना पड़ा है। खेड़ा ने कहा, इन मशीनों को वापस मंगाए जाने के कारण के बारे में राजनीतिक दलों को विस्तार से जानकारी नहीं दी गई है। हमारे जमीनी स्तर के कार्यकर्ता हमें बताते हैं कि उन्हें सूचित किया गया था कि यह गतिविधि चुनाव अधिकारियों द्वारा सामान्य प्रक्रिया के रूप में की जा रही है। चुनाव आयोग द्वारा सूचित किए जाने के बजाय हमें मीडिया रिपोर्टों के जरिये इस मुद्दे की गंभीरता का एहसास हुआ।
खेड़ा ने कहा कि यह उन घटनाओं की श्रृंखला में नई कड़ी है, जिन्होंने धीरे-धीरे ईवीएम और वीवीपैट में जनता के विश्वास को कम किया है। हम आशा करते हैं कि चुनाव आयोग हमारे सवालों का पूरी तरह से और तेजी से जवाब देगा और वीवीपीएटी को लेकर उठाए गए सवालों को सक्रिय रूप से दूर करके जनता के विश्वास को बहाल करेगा।