मेघालय की विधानसभा में शुक्रवार को एक रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट में खुलासा किया गया कि पिछले साल एक पूर्व उग्रवादी नेता की मुठभेड़ के दौरान हुई मौत की वजह 'खराब अभियान' था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस अभियान अपने उद्देश्य में नाकाम रहा। हालांकि आयोग ने पूर्व उग्रवादी नेता चेरिस्टरफील्ड थांगरीव की हत्या में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई सिफारिश नहीं की।
'बिना दिमाग इस्तेमाल किए अभियान को दिया अंजाम'
हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश व जांच आयोग के प्रमुख टी. वैफेई ने अपनी रिपोर्ट में कहा, मेरे विचार से अभियान सुनियोजित था, लेकिन इस पर अमल खराब तरीके से किया गया। लापरवाही, जल्दबाजी और और बिना दिमाग का इस्तेमाल किए इस अभियान को अंजाम दिया गया।
एचएनएलसी के संस्थापक महासचिव थे थांगरिव
चेरिस्टरफील्ड थांगरिव (54) कभी खूंखार उग्रवादी नेता के रूप में जाने जाते थे। वे हाइनीवट्रेप नेशनल लिबरेशन काउंसिल (एचएनएलसी) के संस्थापक महासचिव थे। हालांकि उन्होंने 2018 में सरेंडर कर दिया था।
पुलिस का दावा- जवाबी गोलीबारी में मारे गए
राज्य पुलिस ने बीते साल 2021 के अगस्त माह में मवलाई इलाके में उनके घर पर छापेमारी की थी। पुलिस के मुताबिक, राज्य में आईईडी हमलों की जांच में थांगरीव की 'प्रत्यक्ष संलिप्तता' का पता चला था। जवाबी गोलीबारी में थांगरीव मारे गए।
'थांगरिव को जिंदा पकड़ने में विफल रहा अभियान'
वहीं मेघालय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ने भी इस अभियान को असफल करार दिया। उन्होंने कहा कि वह मृतक (थांगरीव) को जिंदा पकड़ने के अपने उद्देश्य में विफल रहे।उन्होंने कहा कि इससे पुलिस को अवैध आतंकवादी संगठन की विध्वंसक गतिविधियों के बारे में बहुमूल्य जानकारी मिल सकती थी।
अभियान के दौरान उपलब्ध नहीं थी एम्बुलेंस
जांच आयोग के प्रमुख वैफेई ने कहा कि पुलिस ने अभियान के दौरान रात में देखने के लिहाज से अनुकूल उपकरणों का उपयोग नहीं किया और इस दौरान एम्बुलेंस भी उलब्ध नहीं थी।