इस साल लोकसभा चुनाव के दौरान अप्रैल महीने में मीडिया द्वारा छापी गई लगभग 40 फीसदी खबरें एकपक्षीय थीं। यह खुलासा एक अध्ययन में हुआ है, जिसमें आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) द्वारा समाचारों की विश्वसनीयता जांची गई। हालांकि, फर्जी समाचारों (फेक न्यूज) के मामले में मीडिया घरानों ने इस महीने (अप्रैल) में काफी बेहतर काम किया। इस महीने में छापी गईं 85 फीसदी खबरें विश्वसनीय थीं।
यह अध्ययन इंग्लैंड के एक स्टार्टअप ने किया। इस स्टार्टअप के के संस्थापक लिरिक जैन ने बुधवार को कहा, '"मीडिया ने तथ्यों का सावधानीपूर्वक चयन किया, जैसे कि एक समाचार गलत नहीं था, लेकिन पक्षपातपूर्ण था।'
अस अध्ययन में अप्रैल में, जब चुनावी हलचल अपने चरम पर थी, विभिन्न मीडिया घरानों द्वारा प्रकाशित की गईं 1.68 लाख चुनाव संबंधी समाचारों को शामिल किया गया था। अध्ययन में पता चला कि इनमें से 50 हजार समाचार एकपक्षीय थे, जो कि 40 फीसदी बैठता है।
जैन ने कहा कि एआई एल्गोरिद्म विभिन्न तरीकों से समाचार का एकपक्षीय होना या न होना तय करता है। उदाहरण को तौर पर लेख उद्देश्यपूर्ण है या व्यक्तिपरक है। समाचार में ऐसे शब्दों का प्रयोग जो सनसनीखेज हो सकते हैं। स्टार्टअप ने अप्रैल महीने के लिए अंग्रेजी भाषा में समाचार देने वाले 3000 सूत्रों सहित 3000 मुख्यधारा के प्रकाशकों की समाचार सामग्री का अध्ययन किया।
फेक न्यूज के संबंध में जैन ने कहा कि इस अध्ययन में कुल मिलाकर 9.5 लाख समाचारों को शामिल किया गया था। इनमें से 33 हजार फर्जी निकले, जबकि 1.33 लाख अविश्वसनीय थे। जैन ने दावा किया कि उनकी कंपनी ने ऐसा एल्गोरिद्म विकसित किया है जो विभिन्न इनपुट की सहायता से फेक न्यूज की पहचान कर सकता है।