देश के चार राज्य ऐसे हैं, जहां पर सूचना आयोग निष्क्रिय पड़े हुए हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन चारों राज्य में लंबे समय से सूचना आयुक्त की तैनाती नहीं की गई है। इसके चलते शिकायतों और अपीलों पर सुनवाई नहीं हो पा रही है। सतर्क नागरिक संगठन की ओर से सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के लागू होने की 19वीं वर्षगांठ पर जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक गोवा, झारखंड, त्रिपुरा और तेलंगाना में सूचना आयुक्त नहीं हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि आरटीआई एक्ट के मुताबिक राज्य और केंद्रीय सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त और 10 सूचना आयुक्त होते हैं, जो लोगों की शिकायतों और अपीलों पर फैसला सुनाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में मई 2020 से अब तक किसी भी सूचना आयुक्त की तैनाती नहीं की गई है। वहीं त्रिपुरा में तीन साल, तेलंगाना में 19 महीने और गोवा में सात महीने से सूचना आयुक्त नहीं है। यही हाल केंद्रीय सूचना आयोग का है। यहां भी मुख्य सूचना आयुक्त समेत सूचना आयुक्त हैं। इसके चलते सूचना आयोगों का काम प्रभावित हो रहा है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि एक जुलाई 2023 से 30 जून 2024 तक 27 सूचना आयोगों में 231417 अपीलें और शिकायतें दर्ज की गईं। इसमें से आयोगों ने 225929 मामलों का निपटारा किया। इनमें से महाराष्ट्र ने सबसे ज्यादा 56603 मामले निपटाए। जबकि उत्तर प्रदेश ने 31510 और कर्नाटक ने 28630 मामलों का निपटारा किया। रिपोर्ट में बताया गया कि केंद्रीय सूचना आयोग ने इस दौरान 19347 मामले सुने और 14 हजार शिकायतों और अपीलों को लौटा दिया।
रिपोर्ट में कहा गया लौटाए गए मामलों में 96 फीसदी ऐसे रहे, जिनको दोबारा सूचना आयोग के पास नहीं लाया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि 30 जून 2024 को 29 सूचना आयोगों में लंबित अपीलों और शिकायतों की संख्या 4.05 लाख थी। इनमें पुराने मामलों की संख्या अधिक थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि शिकायतों की स्थिति को देखते हुए साफ है कि 14 बड़े सूचना आयोगों को मामलों को निपटाने में एक साल से अधिक समय लगा। जबकि निपटान दर और लंबित मामलों के हिसाब से छत्तीसगढ़ को किसी आवेदन को निपटाने में पांच साल से अधिक का समय लगा। वहीं केंद्रीय सूचना आयोग को किसी अपील या शिकायत को निपटाने मे वर्ष और चार महीने लगा।
रिपोर्ट में कहा गया कि मामलों के निपटान में लंबी देरी के दो मुख्य कारण हैं। इनमें पहला आयोगों में खाली पड़े पद और आयुक्तों द्वारा निपटान की धीमी दर। बताया गया कि केंद्रीय सूचना आयोग ने मामलों के निपटान के लिए प्रति आयुक्त सालाना 3,200 मामलों का मानक निर्धारित किया है। जबिक अन्य सूचना आयोगों ने ऐसा नहीं किया है।