बढ़ता तापमान इन्सानों के साथ-साथ ध्रुवीय भालू, पक्षियों, मछलियों, कीट-पतंगों सहित छोटे बड़े अन्य जंगली जानवरों को भी प्रभावित कर रहा है। एक नए अध्ययन से पता चला है कि ऋतुओं और चरम मौसमी स्थितियों में आ रहा अचानक बदलाव जानवरों की नींद कम कर रहा है जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट, चेक यूनिवर्सिटी ऑफ लाइफ साइंसेज और स्वानसी यूनिवर्सिटी से जुड़े शोधकर्ताओं के इस अध्ययन के नतीजे जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ द रॉयल सोसाइटी बायोलॉजिकल साइंसेज में प्रकाशित हुए हैं।
जरूरी है बेहतर नींद
शोधकर्ताओं का कहना है कि इंसानों की तरह जानवरों के लिए भी बेहतर नींद जरूरी है। पर्याप्त और बेहतर नींद उन्हें शारीरिक तौर पर स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है, साथ ही यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यावश्यक है। पर्याप्त नींद न लेने से उसका प्रभाव लंबे समय तक देखा गया। कम नींद लेने वाले जानवर समय से पहले ही दुर्बल और झींण हो गए।
घट जाती है चपलता, होते हैं आक्रामक...
गर्म व नम दिनों में जानवरों की नींद की मात्रा और गुणवत्ता काफी घट जाती है, जबकि ठंडे मौसम, बर्फ और बारिश के दौरान सुधार आता है। नींद कम होने से जानवरों की दक्षता में कमी आती है। उनकी चपलता घट जाती है और भूख पर भी असर दिखाई देता है। कुल मिलाकर कम नींद उनके व्यवहार को प्रभावित करती है और वे ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं।
इन्सानों पर भी दिखता है असर वीन्स यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और अध्ययन से जुड़ीं प्रमुख शोधकर्ता डॉ. इसाबेला कैपेलिनी ने निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए आशंका जताई है कि तापमान बढ़ने का असर इन्सनों की नींद पर भी पड़ता है। जो लोग लगातार कम सोते हैं या अच्छे से नींद पूरी नहीं करते उन्हें आलस्य और शारीरिक दुर्बलता का अहसास होता है। पर्याप्त नींद न लेने से कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं।
इस तरह का सबसे लंबा और विस्तृत अध्ययन
शोधकर्ताओं के अनुसार इस बारे में बहुत सीमित जानकारी है कि पर्यावरण जंगली जानवरों की नींद को कैसे प्रभावित करता है। ऐसे में क्वीन्स यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में जंगली सूअरों पर किए इस अध्ययन का उद्देश्य यह समझना था कि कैसे मौसम और जलवायु में आ रहे बदलाव इन जीवों की नींद को प्रभावित कर रहे हैं।
जंगली जानवरों की नींद को लेकर किया यह अब तक का सबसे लम्बा और विस्तृत अध्ययन है। शोधकर्ताओं ने चेक गणराज्य के दो स्थानों पर करीब 30 जंगली सूअरों की नींद और सोने के व्यवहार को रिकॉर्ड किया। जानवरों को परेशान किए बिना तीन वर्षों तक उनकी नींद को ट्रैक करने के लिए विशेष उपकरणों की भी मदद ली गई।