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उत्तर प्रदेश सामाजिक न्याय कमेटी की रिपोर्ट का ठंडे बस्ते में जाना तय

Sat, 29 Dec 2018 04:46 AM IST
Gaurav Pandey हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
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ओबीसी में शामिल जातियों में 27 फीसदी आरक्षण के बंटवारे के लिए यूपी सरकार द्वारा गठित सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट के ठंडे बस्ते में जाना करीब-करीब तय है। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय से पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जनवरी के दूसरे हफ्ते में प्रदेश में कई पक्षों से गहन विमर्श करेंगे। दरअसल समिति द्वारा यादव, कुर्मी और जाट बिरादरी को पहली श्रेणी में रखने और इन्हें 27 में से केवल 7 फीसदी आरक्षण देने की सिफारिश से केंद्रीय नेतृत्व परेशान है। 

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पार्टी नेतृत्व का मानना है कि पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में खुल कर राजग का समर्थन करने वाली कुर्मी और जाट बिरादरी इससे नाराज हो सकती है। समिति की रिपोर्ट पर पार्टी की दोनों सहयोगियों की भी राय अलग-अलग है। भारतीय समाज पार्टी के सुहेलदेव इसे लागू करने के पक्ष में हैं, जबकि कुर्मी आधार वाले अपना दल का कहना है कि आरक्षण का सही बंटवारे के लिए पहले देश में जातिगत जनगणना करा कर उचित संख्या का पता लगाना चाहिए। पार्टी के जाट और कुर्मी नेता भी इस रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डालने के पक्षधर हैं। 

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यदि यूपी में रिपोर्ट लागू हुई, तो जाट बिरादरी होगी नाराज

जाट बिरादरी के पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना था कि हम अब तक इस बिरादरी के लिए केंद्रीय नौकरियों में आरक्षण का फार्मूला तय नहीं कर पाए। अगर यूपी में यह रिपोर्ट लागू हुई तो आरक्षण का लाभ ले रही जाट बिरादरी में नाराजगी पैदा होगी। खासतौर पर पश्चिम यूपी, जहां इस बिरादरी का काफी प्रभाव है। 

पार्टी सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट आने के बाद जाट और कुर्मी बिरादरी की नाराजगी के बाद भाजपा नेतृत्व ने इस मामले में तत्काल फैसला नहीं करने का आश्वासन दिया है। केंद्रीय स्तर पर आम राय है कि लोकसभा चुनाव से पूर्व इस कमेटी की रिपोर्ट पर आगे बढ़ने से नई मुसीबत खड़ी होगी। गौरतलब है कि सूबे में राजनाथ के सीएम रहते कोटे में कोटा तय करने की कोशिश हुई थी, हालांकि तब भी संबंधित रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।
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