आदेश का पालन न होने से खफा मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसा करने वाले आईएएस अधिकारियों को दरवाजा दिखाने की जरूरत है। उनसे आईएएस पद छीन लिया जाना चाहिए। जस्टिस एस. वैद्यनाथन और जस्टिस आर. विजयाकुमार की खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यह साफ करने का समय आ गया है कि आर्थिक दंड दूसरा विकल्प है और जेल भेजना पहला।
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पहले भी देखा गया है कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट 1971 की धारा 80-ए के तहत दिए अदालत के आदेशों का कुछ आईएएस अधिकारी पालन नहीं करते। अदालती आदेशों की अनदेखी कर कर्तव्य का पालन नहीं करने वाले आईएएस अधिकारियों को हटाया जाना चाहिए। अदालत के आदेश का अनादर करने से साफ है कि वे अपना काम ईमानदारी से नहीं कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने इसके बाद ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन के तालाबंदी, सीलिंग और तोड़फोड़ के नोटिस पर रोक लगाने की दो याचिकाएं ठुकरा दीं।