शिवसेना ने मंगलवार को भाजपा से कहा कि वह निडर होकर उन नौकरशाहों को महाराष्ट्र सचिवालय से हटा दें जिन्होंने परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी की और विकास को बाधित किया। शिवसेना ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा अपनी योजनाओं को लागू नहीं करने के लिए अगर उन्होंने आलोचना की है तो इसके पीछे के गुस्से को समझा जाना चाहिए।
उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना की गठबंधन के अपने वरिष्ठ सहयोगी भाजपा के साथ अक्सर ठनी रही है और वह केंद्र और महाराष्ट्र सरकार की आलोचना में मुखर रहे हैं। शिवसेना की टिप्पणी भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा राज्य के नौकरशाही की आलोचना के एक दिन बाद आई है।
गडकरी ने कहा कि प्रदेश की नौकरशाही विशेष रूप से आईएएस अधिकारियों की एक "नकारात्मक मानसिकता" विकास में बाधा पहुंचा रही है। गडकरी ने सोमवार को नागपुर में एक समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की मौजूदगी में यह बात कही थी।
शिवसेना ने कहा कि राज्य में पिछले बीजेपी-शिवसेना शासन के दौरान विकास के रास्ते में आने वाली ऐसी बाधाएं 'मंत्रालय' (राज्य सचिवालय) से "निडर रूप से हटा दिए" गए थे। शिवसेना ने पार्टी मुखपत्र 'सामना' में एक संपादकीय में कहा, "यह तर्क देना आसान है कि ऐसे बाधाओं के कारण विकास नहीं हो रहा है। हालांकि, इस तरह की बाधाओं को निडरता से बाहर दूर करने और विकास को आगे बढ़ाना एक मजबूत प्रशासक की निशानी होती है।"
केंद्र और महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी दल शिवसेना ने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन नहीं होने पर पैदा होने वाले गुस्सा को समझा जाना चाहिए। सेना ने दावा किया कि मौजूदा सरकार द्वारा पिछले साढ़े-तीन साल के दौरान की गई अनगिनत घोषणाओं को लागू नहीं किया गया और यह केवल कागजों पर ही मौजूद रही। सेना ने पूछा कि "राज्य का राजकोष अस्थिर है, जबकि ऋण दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। विकास के लिए पैसा कहां मिल रहा है।"