सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सैम हिगिनबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज (SHUATS) के कुलपति राजेंद्र बिहारी लाल को कथित धर्म परिवर्तन मामले समेत दो आपराधिक मामलों में जमानत दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा लाल की जमानत याचिका पर सुनवाई में देरी पर सवाल उठाया। कोर्ट ने पूछा कि क्या हमें इस विषय की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बारे में कुछ चिंता नहीं है? लाल की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार की पीठ ने चार मार्च को अंतरिम जमानत दी थी। यह मामले प्रयागराज के नवाबगंज और नैनी पुलिस स्टेशनों में दर्ज दो एफआईआर के संबंध में थे। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम 4 मार्च को पारित अंतरिम जमानत आदेश की पुष्टि कर रहे हैं। हमने यह भी महसूस किया कि राज्य पुलिस इस मामले में अतिरिक्त रुचि ले रही है। उन्होंने आगे कहा कि लाल को एक एफआईआर में लंबित जांच में पुलिस का सहयोग करना होगा।
लाल के खिलाफ दर्ज हुए थे मामले
लाल के खिलाफ धारा 307 (हत्या का प्रयास), आईपीसी की धारा 386 (जबरन वसूली), 504 (शांति भंग करने के उद्देश्य से जानबूझकर अपमान) के तहत मामले दर्ज हैं। उन पर उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम, 2021 के कुछ प्रावधानों के तहत भी मामला दर्ज किया गया था।
यूपी पुलिस ने कोर्ट को बताई थी ये बातें
लाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद गिरफ्तार किया गया था। उत्तर प्रदेश पुलिस ने पहले कोर्ट को बताया था कि लाल सामूहिक धर्म परिवर्तन कार्यक्रम के मुख्य आरोपी हैं। पुलिस ने यह भी बताया था कि लाल दो दशकों में धोखाधड़ी और हत्या सहित 38 मामलों में शामिल था। पुलिस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि करीब 90 हिंदुओं को धर्मांतरण के उद्देश्य से हरिहरगंज, फतेहपुर में इवेंजेलिकल चर्च ऑफ इंडिया में लाया गया था। सभी लोगों को पैसे का लालच दिया गया था।