केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बृहस्पतिवार को कहा कि धर्म किसी के व्यक्तिगत अधिकारों को नियंत्रित नहीं कर सकता। साथ ही उन्होंने समान नागरिक संहिता के मामले में कांग्रेस द्वारा अपनाए जा रहे रुख की कड़ी आलोचना की और कहा कि सभी भारतीयों के लिए समान नागरिक संहिता को संविधान सभा ने तैयार किया है। जेटली ने कहा कि संविधान ने सभी को समानता और प्रतिष्ठा के साथ रहने का अधिकार दिया है। ऐसे में जहां तक निजी कानूनों का सवाल है तो मेरा मानना है कि यह संविधान के द्वारा नियंत्रित होना चाहिए।
वित्त मंत्री ने कहा कि निजी कानूनों को अभ्यास नहीं बनाया जा सकता। साथ ही इसकी वजह से किसी की प्रतिष्ठा से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि धर्म किसी के अधिकारों को नियंत्रित नहीं कर सकता। जेटली ने कहा कि तीन तलाक पर सरकार का हलफनामा उसका धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण है।
विभिन्न मुस्लिम संगठनों द्वारा सरकार की आलोचना को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि निजी कानूनों में विभिन्न सरकारों ने संशोधन किया है। उन्होंने कहा कि राजग की पहली सरकार के शासनकाल में ईसाइयों के तलाक के मामले में संशोधन किया गया था, जिसका उन लोगों ने पूरा समर्थन किया था। मनमोहन सिंह की सरकार ने भी हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में संशोधन किया था।