बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के भाजपा विधायक गणेश नाईक को दुष्कर्म के मामले में अग्रिम जमानत दे दी। हाईकोर्ट जज ने कहा कि संबंधित महिला और नाईक 1993 से रिलेशनशिप में थे, इसलिए प्रथम दृष्ट्या इसे दुष्कर्म नहीं माना जा सकता।
इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने विधायक नाईक को राहत प्रदान कर दी। उनके खिलाफ नवी मुंबई पुलिस में एक महिला ने दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। उस महिला ने दावा किया कि नाईक उसके बेटे के जैविक पिता हैं।
इसके पहले सेशन कोर्ट विधायक नाईक की याचिका नामंजूर कर दी थी। एक महिला ने 7 अप्रैल को एक याचिका दायर कर कहा था कि वह 17 वर्षों से गणेश नाईक के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रही थी और उसे एक 15 साल का बच्चा भी है जो कि गणेश नाईक का है। जब गणेश नाईक की तरफ से कोई जवाब नहीं आया तो महिला ने 14 अप्रैल को सीबीडी बेलापुर पुलिस स्टेशन में नाईक पर जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज कराया था। उसके बाद 15 अप्रैल को महिला ने गणेश नाईक पर बलात्कार का मामला दर्ज कराया था।
नाईक ने पहले ठाणे सत्र न्यायालय में अंतरिम जमानत की याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान गणेश नाईक ने महिला के साथ संबंध होने की बात कबूल कर ली थी। महिला ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया था कि नाईक ने उससे वादा किया था कि जब उसका बेटा पांच साल का हो जाएगा तब उसे पिता के तौर पर अपना नाम दे देंगे, लेकिन बाद में वे इससे मुकर गए।