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केरलम: मर्सिडीज हादसे में आरोपी जज को राहत, केरल हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक, पीड़ित परिवार ने क्या कहा

Thu, 29 Oct 2026 03:01 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, कोच्ची

सार

केरल हाईकोर्ट ने जानलेवा कार हादसे के मामले में आरोपी बनाए गए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश को फिलहाल गिरफ्तार नहीं करने का निर्देश दिया है। हादसे में जज के 17 वर्षीय बेटे की कार की टक्कर से स्कूटर सवार की मौत हो गई थी।
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केरल हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को पुलिस को निर्देश दिया कि जानलेवा सड़क हादसे के मामले में आरोपी बनाए गए एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश को फिलहाल गिरफ्तार न किया जाए। इस हादसे में जज के 17 साल के बेटे की चलाई जा रही मर्सिडीज-बेंज कार की टक्कर से एक स्कूटर सवार की मौत हो गई थी। हादसा चेरानल्लूर इलाके में हुआ था।

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कोर्ट के फैसले से परिवार निराश
हाईकोर्ट के इस फैसले पर मृतक के परिवार ने निराशा जताई है। हालांकि, परिवार ने कहा कि वह अदालत के फैसले का सम्मान करता है और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए अपने वकील से सलाह लेगा। परिवार ने साफ कहा कि वह इस मामले में पीछे हटने वाला नहीं है और अपनी लड़ाई जारी रखेगा।

जज को जांच में सहयोग करने का निर्देश
जस्टिस कौसर एडप्पागाथ ने जज की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। अदालत ने जज को पुलिस जांच में सहयोग करने के लिए भी कहा है। वहीं, मृतक के परिवार ने मामले में खुद को पक्षकार बनाने के लिए याचिका दायर की है। कोर्ट इस याचिका पर बाद में सुनवाई करेगा।
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तेज रफ्तार बेंज कार की टक्कर से हुई थी मौत
यह हादसा रविवार तड़के हुआ था। चेरानल्लूर के साउथ चित्तूर में रहने वाले 55 वर्षीय जयाबालकृष्णन मारापरम्बु के पास कंटेनर रोड से अपने स्कूटर पर घर लौट रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार मर्सिडीज-बेंज कार ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में उनकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, कार जज के नाम पर रजिस्टर्ड है।

पहले नाबालिग के खिलाफ दर्ज हुआ था मामला
पुलिस ने शुरुआत में इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) के तहत केस दर्ज किया था। यह धारा लापरवाही के कारण किसी की मौत होने से जुड़ी है। रविवार शाम को पुलिस ने नाबालिग को थाने से जमानत पर छोड़ दिया था।

थाने के बाहर हुआ विरोध प्रदर्शन
नाबालिग को छोड़ने के बाद चेरानल्लूर पुलिस थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। मृतक के बेटे और बेटी ने कुछ कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर आरोपी की गिरफ्तारी और उसे किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश करने की मांग की। परिवार का कहना था कि मामले में उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

पुलिस ने बाद में बढ़ाई गंभीर धारा
विरोध के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले में हस्तक्षेप किया। शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने BNS की धारा 105 भी जोड़ दी। यह धारा गैर-इरादतन हत्या से जुड़े मामलों में लगाई जाती है। बाद में किशोर न्याय बोर्ड ने नाबालिग को जमानत दे दी। पुलिस ने इसके साथ ही उसके पिता यानी जज को भी मामले में आरोपी बनाया।

जज से दोबारा पूछताछ की तैयारी
पुलिस के मुताबिक, बुधवार को जज से पूछताछ की गई थी। गुरुवार दोपहर को उनसे फिर पूछताछ की जानी थी। इसी बीच जज ने गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।

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'कानूनी लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे'
मृतक जयाबालकृष्णन की बेटी भद्रकीर्ति ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि परिवार हाई कोर्ट के फैसले से निराश जरूर है, लेकिन वह इसका सम्मान करता है। उन्होंने कहा, 'हम निश्चित रूप से निराश हैं, लेकिन हम हाई कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। हम अपने वकील से बात करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे। हम इस मामले को कानूनी तरीके से आगे बढ़ाना चाहते हैं और एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे। हमारी लड़ाई जारी रहेगी।'  भद्रकीर्ति ने यह भी कहा कि मामले के दूसरी तरफ एक जज होने की वजह से परिवार अपने वकील से सलाह लेकर आगे का कदम तय करेगा।

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