माकपा नेता सीताराम येचुरी ने एयर इंडिया टाटा समूह को बेचने के सरकार के निर्णय का कड़ा विरोध किया है। सोमवार को उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि यह बिक्री नहीं बल्कि टाटा समूह को केंद्र की भेंट है। यह राष्ट्रीय संपदा की दिनदहाड़े हाईवे पर लूट जैसा है।
माकपा महासचिव येचुरी ने आरोप लगाया कि एयर इंडिया के 46,262 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ देश की जनता उठाएगी। केंद्र सरकार लगातार देश के संपत्ति को लुटवा रही है। देश की पहचान राष्ट्रीय एयर लाइंस को टाटा समूह को बेचने के निर्णय पर कड़ा एतराज जताते हुए येचुरी ने कहा कि यह बिक्री एक तरह से टाटा समूह को मोदी सरकार की मुफ्त भेंट की तरह है। उन्होंने कहा कि टाटा समूह को एयर इंडिया का 15,300 करोड़ रुपये का कर्ज विरासत में मिलेगा। निश्चित रूप से इसका पुनर्गठन किया जाएगा, यानी उसे केंद्र सरकार को मात्र 2700 करोड़ रुपये ही चुकाना होंगे।
येचुरी ने दावा किया कि एयर इंडिया के कर्ज के बचे 46,262 करोड़ रुपये का बोझ सरकार का रहेगा, यानी इसे देश की जनता उठाएगी। जबकि एयर इंडिया द्वारा इस कर्ज से खरीदी गई सारी संपत्ति, जिसमें नए विमानों को बेड़ा भी शामिल है, वह अब टाटा की संपत्ति हो जाएगा।
जम्मू कश्मीर को लेकर किया सवाल
माकपा नेता ने जम्मू कश्मीर में हिंसा को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि केंद्र सरकार ने क्षेत्र में शांति का वादा किया था जून में पीएम के साथ राज्य के नेताओं की बैठक में 'दिल की दूरी, दिल्ली की दूरी' मिटाने का वादा किया गया था, यह खोखला नारा बनकर रह गया। येचुरी ने लखीमपुर खीरी मामले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र को तत्काल हटाने की मांग भी की।
कांग्रेस से गठबंधन पर येचुरी ने यह कहा
कांग्रेस के साथ राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में येचुरी ने कहा कि इस बारे में निर्णय दोनों पार्टी मिलकर करेगी। उन्होंने कहा कि अब हमारा फोकस भाजपा को अलग थलग करना और हराना है। हम यह देखेंगे कि राज्यवार यह कैसे अच्छे से कर सकते हैं। भाजपा विरोधी वोटों को ज्यादा से ज्यादा डलवाने पर भी जोर रहेगा। हम हमारी कमजोरियां भी दूर करे रहे हैं। पार्टी सूत्रों ने संकेत दिया है कि माकपा का शीर्ष नेतृत्व कांग्रेस के साथ राष्ट्रव्यापी गठबंधन के खिलाफ है। पार्टी के पोलिट ब्यूरो की बैठक में में केरल के माकपा नेताओं ने इसका विरोध किया, जबकि बंगाल के नेता चाहते हैं कि कांग्रेस के साथ मिलकर साझा विपक्ष तैयार किया जा सकता है।