दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि पिछली सरकार पैसे की कमी होने की बात कहा करती थी, लेकिन सीएजी रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि उस समय सरकार के पास 5200 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि उपलब्ध थी, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने श्रमिकों की बेहतरी के लिए कोई काम नहीं किया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा में कहा कि पिछली सरकार ने श्रमिकों के हितों में बड़ी घोषणाएं की थीं, लेकिन उन पर कोई अमल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के पास श्रमिक फंड में 5200 करोड़ रुपये की राशि मौदूद थी, लेकिन आम आदमी पार्टी सरकार ने इसका कोई उपयोग नहीं किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने श्रमिकों से पंजीकरण के लिए 25 रुपये और नवीनीकरण के लिए 20 रुपये वसूलती रही, जबकि केंद्र सरकार यह सेवा पूर्णतः नि:शुल्क देती है। श्रमिकों का वार्षिक डाटा केवल 7 प्रतिशत ही नवीनीकरण हो सका, जबकि केंद्र का डाटा 100 प्रतिशत रिन्यू होता है।
सीएम ने सीएजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछली सरकार के पास श्रमिकों के कल्याण के लिए हजारों करोड़ रुपये की राशि होते हुए भी उसे खर्च नहीं किया गया। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि यदि सरकार के पास मजदूरों को 8000 रुपये की सहायता देने का प्रावधान था, तो उन्हें केवल 2000 रुपये क्यों दिए गए?
'20 हजार की आर्थिक सहायता और मेडिकल सहायता भी नहीं'
आरोप है कि 2024 तक किसी भी वर्ष एक भी श्रमिक को 20,000 रुपये की सहायता नहीं दी गई, जबकि यह राशि श्रमिक की आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण होती है। इसी प्रकार, परमानेंट डिसेबिलिटी योजना के अंतर्गत एक लाख रुपये की सहायता भी कई वर्षों तक शून्य रही, यानी इस मद में एक भी श्रमिक को कोई लाभ नहीं दिया गया।
मेडिकल सहायता के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018, 2019, 2022 और 2024 में किसी भी श्रमिक को इसका लाभ नहीं दिया गया। दिल्ली सरकार ने श्रमिकों के बच्चों को पढ़ाने जैसी कई योजनाओं की बात कही थी, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार किसी भी श्रमिक को इसका लाभ नहीं दिया गया।