कोरोना ने न सिर्फ लोगों की जिंदगियां छीनी, बल्कि मासूमों के खिलखिलाते बचपन को भी नजर लगा दी। दरअसल जिन जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए केंद्र सरकार मासूमों को मुफ्त टीका लगवाती है, वो कोरोना की वजह से बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक तकरीबन 21 लाख बच्चे विभिन्न बीमारियों से बचाव वाले नियमित टीकाकरण करवा ही नहीं सके। अब केंद्र सरकार एक विशेष योजना के तहत सभी बच्चों का टीकाकरण करा कर उनको निरोगी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। जिम्मेदारों को पूरा भरोसा है कि जल्द ही विशेष अभियान के तहत यह टीकाकरण पूरा हो जाएगा।
टीकाकरण के तय लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार दो चरणों में इंटेंसिफाइड मिशन इन्द्रधनुष (आईएमआई) शुरू कर चुकी है। पहला चरण 22 फरवरी से शुरू हो चुका है। जबकि दूसरा चरण 22 मार्च से शुरू किया जाएगा। प्रत्येक चरण पन्द्रह दिन के लिए आयोजित किया जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (ईविन) प्लेटफॉर्म के जरिए राज्यों से टीकाकरण की जिलेवार सूचना जमा की जाएगी। जिसमें वैक्सीन संरक्षण के अलावा वैक्सीन की उपलब्धता का भी पता लगाया जा सकेगा। सेफवैक के जरिए वैक्सीन लेने के बाद किसी तरह के एडवर्स इवेंट फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन (एईएफआई) के मामलों की जानकारी तुरंत दी जा सकेगी।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने 1985 में यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन कार्यक्रम (यूआईपी) की शुरुआत की थी। इसके तहत हर साल 2.6 करोड़ बच्चों और 2.9 गर्भवती महिलाओं को हर साल नियमित टीकाकरण के तहत वैक्सीन दी जाती है। इन वैक्सींस से दस जानलेवा बीमारियां जिसमें, डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, पोलियो, खसरा, रूबेला, टीबी, रोटावायरस, डायरिया, हेपेटाइटिस बी, मेनिंजाइटिस, हीमोफिलिक इंफ्लूएंजा, न्यूमोकॉकल और जैपनीज इंसेफेलाइटिस से बचाव होता है। जबकि जेई की वैक्सीन प्रभावित जिलों में ही दी जाती है।