टीबी मुक्त भारत के लिए देश में पहला वयस्क बीसीजी टीकाकरण शुरू हुआ। पहली खुराक गोवा के एक स्वास्थ्य केंद्र पर दी गई है। देश के सभी जिलों में वयस्क आबादी को टीबी संक्रमण से बचाने के लिए यह टीका दिया जाएगा और साथ में प्रतिकूल प्रभावों को लेकर अध्ययन भी किया जाएगा। इसके बाद राष्ट्रीय टीकाकरण में बीसीजी को शामिल किया जा सकता है।
बीसीजी (बैसिलस कैलमेट-गुएरिन टीका) टीकाकरण के लिए सरकार ने कोरोना टीकाकरण की तरह ही डिजिटल स्वरूप दिया है। टीबी-विन नामक वेबसाइट शुरू की है जहां मोबाइल नंबर के जरिये पंजीयन करने के बाद वयस्क आबादी टीकाकरण में हिस्सा ले सकती है। टीकाकरण के लिए सबसे पहले 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों को प्राथमिकता दी गई है। इनके अलावा दूसरी बीमारियों से ग्रस्त मरीज और जो लोग टीबी संक्रमण से ठीक हुए हैं उन्हें भी खुराक सबसे पहले दी जाएगी।
18 वर्ष से अधिक उम्र वालों पर जांच
दक्षिण गोवा के जिला अस्पताल में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने बताया कि अध्ययन 18 वर्ष से अधिक उम्र के कमजोर व्यक्तियों में बीसीजी टीका की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करेगा और परिणाम को अधिसूचित टीबी मामलों में बदलाव से मापा जाएगा। टीबी को लेकर अभी तक बच्चों में बीसीजी का टीका असरदार साबित हुआ है। वयस्क आबादी को लेकर परिणाम एक जैसे नहीं है। वयस्कों को टीबी से बचाने के लिए इसका इस्तेमाल करने से पहले एक अध्ययन किया जा रहा है, जिसके जरिये अलग-अलग जिलों में लोगों को खुराक देने के बाद कुछ समय तक उनकी निगरानी की जाएगी। साथ ही देखा जाएगा कि लोगों में टीबी के खिलाफ एंटीबॉडी यानी प्रतिरक्षा कितने समय तक मजबूत रहता है।
यूपी, हरियाणा सहित 23 राज्यों में परीक्षण
उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्य प्रदेश सहित 23 राज्यों में बीसीजी का टीबी संक्रमण को लेकर परीक्षण होगा। यहां के जिलों को दो भागों में बांटा है। 50 फीसदी जिलों में लोगों को स्वास्थ्य कार्यकर्ता टीका देंगे जबकि अन्य जिलों में प्लेसबो यानी टीका जैसा ही दिखने वाला तरल पदार्थ दिया जाएगा। अभी तक यह टीका छोटे बच्चों को टीबी संक्रमण से बचाने में दिया जाता है। ऐसे में वयस्क आबादी को फिर से टीका की खुराक देने के चलते इसे बीसीजी पुन: टीकाकरण परीक्षण नाम दिया है।
एक अध्ययन बूस्टर खुराक का भी होगा
चेन्नई स्थित आईसीएमआर के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन ट्यूबरक्लोसिस की निदेशक सी पद्मप्रिया ने बताया कि जल्द ही बीसीजी टीका और टीबी संक्रमण को लेकर एक नया अध्ययन शुरू किया जाएगा, जिसमें छह से 18 वर्ष तक की आयु के बच्चे और किशोरों को बीसीजी टीका की बूस्टर खुराक दी जाएग। इसमें यह देखा जाएगा कि यह खुराक टीबी संक्रमण को रोकने में कितनी सक्षम हो सकती है?