सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में 2000 सीसी से अधिक इंजन क्षमता वाली एसयूवी और महंगी निजी कारों के पंजीकरण पर लगी रोक जारी रखने का आदेश दिया है।
साथ ही शीर्ष अदालत ने एनसीआर में सभी टैक्सियों को सीएनजी में तब्दील करने की अवधि एक महीने के लिए बढ़ा दी है। पूर्व में अदालत ने कहा था कि एक अप्रैल से एनसीआर में सिर्फ सीएनजी टैक्सियां ही चलेंगी।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि जब तक कार कंपनियों की याचिकाओं का निपटारा नहीं हो जाता तब तक 2000 सीसी से अधिक इंजन क्षमता वाली एसयूवी और महंगी निजी कारों के रजिस्ट्रेशन पर लगी रोक जारी रहेगी। रजिस्ट्रेशन पर 16 दिसंबर से रोक लगी हुई है। कार कंपनियों का दावा है कि उनकी डीजल की गाड़ियां कम प्रदूषण करती हैं।
शीर्ष अदालत ने यह इशारा किया है कि एनसीआर में महंगी डीजल गाड़ियों पर लगी रोक हटाने पर कार मालिकों को प्रदूषण शुल्क देना होगा। पीठ ने कहा ‘हम अपने पूर्व आदेश में फेरबदल कर सकते हैं लेकिन कार मालिकों को पर्यावरण केनुकसान के बदले में शुल्क चुकाना होगा।
पीठ ने कहा कि ऐसा कोई आधार नहीं है जिससे यह माना जाए कि महंगी डीजल गाड़ियां पेट्रोल गाड़ियां से कम प्रदूषण करती हो। पीठ ने कहा कि कार कंपनियों ने कहा कि क्या आप मुझे स्टडी दे सकते है जो आपकी बात को प्रमाणित करता हो।
पीठ ने कार कंपनियों से कहा कि हमने पूर्व में सार्वजनिक वाहनों को डीजल से सीएनजी में तब्दील करने का आदेश दिया था। क्या डीजल कार पर चलने के लिए चिकित्सकीय सुझाव दिया गया है?
कार कंपनियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सीए सुंदरम द्वारा यह कहने पर कि डीजल कार में ईंधन की खपत कम होती है पीठ ने कहा ‘किस क्लास केलोग महंगी गाड़ियां खरीदते हैं? क्या वे लोग वाकई ईंधन की खपत की चिंता करते हैं? वे लोग धनाढ्य हैं, वे दिखावा केलिए ऐसा करते हैं।