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मोबाइल फोन में एक मई से देशी भाषा होगी अनिवार्य, लागू नहीं होने पर जुर्माना लगा सकती है सरकार

Tue, 10 Apr 2018 11:05 PM IST
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली
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देश में एक मई से बिकने वाले सभी मोबाइल फोन में देशी या क्षेत्रीय भाषा को रखना अनिवार्य होगा। मोबाइल निर्माता कंपनी को उपभोक्ताओं के लिए यह सुविधा देना जरूरी होगा, ऐसा नहीं होने पर सरकार उन पर जुर्माना भी लगा सकती है। 
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क्षेत्रीय भाषा को लागू करने में पिछले दो साल से टालमटोल कर रही मोबाइल निर्माता कंपनियों के लिए इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (आईटी) ने अगले महीने की पहली तारीख अंतिम तिथि के तौर पर तय की है। आईटी मंत्रालय के मुताबिक सरकार अब क्षेत्रीय भाषा नियम को लागू करने में कोई ढील नहीं देगी।

दरअसल मोबाइल में क्षेत्रीय भाषा नहीं होने से उपभोक्ताओं तक सभी सरकारी सेवाओं की जानकारी नहीं पहुंच रही है। इसी वजह से मंत्रालय ने इस बार क्षेत्रीय भाषा नियम को अनिवार्य तौर पर लागू करने का आदेश जारी किया। साथ ही स्पष्ट किया कि उद्योग जगत की परेशानियों के मद्देनजर नियम को लागू करने की तिथि को बढ़ाया गया। 
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मोबाइल में क्षेत्रीय भाषा नियम तय करते वक्त उद्योग जगत की राय भी ली गई थी। तब सरकार और उद्योग जगत इस पर एकमत हुए थे कि अंग्रेजी नहीं बोलने वाले लोगों को मोबाइल में क्षेत्रीय भाषा मुहैया कराने से ई-गवर्नेंस लेनदेन और ई-कॉमर्स व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा। इससे अंग्रेजी नहीं बोलने वाले कई करोड़ लोगों से सीधे सरकार को जुड़ने का मौका भी मिलेगा। 
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कई बार बढ़ाई जा चुकी है तारीख

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गौरतलब है कि अक्टूबर, 2016 को मंत्रालय ने इस व्यवस्था को एक जुलाई, 2017 से लागू करने का निर्णय लिया था। इसके बाद मोबाइल कंपनियों की गुजारिश पर इस तिथि को लगातार बढ़ाया गया। मौजूदा आदेश के लिए जारी की गई अधिसूचना में एक मई से क्षेत्रीय भाषा नियम नहीं लागू करने पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। 

देश में 8वीं अनुसूची के मुताबिक बंगाली, असमी, बोडो, डोगरी, गुजराती, हिन्दी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मराठी, मेइतेइ (मणीपुरी), पंजाबी, सिंधी, तमिल, उड़िया और तेलगू समेत 22 भाषाएं हैं जिनका विकल्प कंपनियों को मोबाइल में देना होगा। 

गौरतलब है कि क्षेत्रीय भाषा को मोबाइल में लागू करने के लिए कंपनियों को अपने डिवाइस में मैसेज टाइप करने के लिए अंग्रेजी, हिन्दी और उपभोक्ता की पसंद की एक क्षेत्रीय भाषा को रखना होगा। इसका प्रयोग की-पैड खुलने पर उपभोक्ता द्वारा व्हाट्सऐप, मैसेज, इंटरनेट सर्फिंग और गूगल में खोज के लिए टाइप करते समय किया जा सकेगा। 
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