आधा दर्जन से ज्यादा शहरों में भरा कमर से ऊंचा पानी और आसमान से देखने पर नदियों के किनारे मीलों तक बड़ी झील जैसा नजारा। यह वर्णन खुद ही इस साल बरसी मानसूनी बारिश की विभीषिका का अंदाजा दे देती है। लेकिन मंगलवार को सामने आए सरकारी आंकड़ों में मानसून का और भी भयावह नजारा देखने को मिला है।
भारतीय मौसम विभाग ने 10 अक्तूबर तक मानसून का असर खत्म होने का अनुमान जारी किया है। इससे बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में थोड़ा राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि इस हिसाब से अमूमन एक जून से एक सितंबर तक चलने वाला चार महीने लंबा मानसूनी सीजन इस बार तकरीबन एक महीना देरी से खत्म होगा। इससे पहले 1961 में मानसून सबसे देरी से खत्म हुआ था। उस साल एक अक्तूबर तक मानसूनी बारिश दर्ज की गई थी।
केंद्र सरकार ने बिहार में बड़े पैमाने पर बाढ़ से बचाव अभियान चालू कर दिया है। एनडीआरएफ की 20 टीमों को बचाव कार्य के लिए भेजा गया है, जबकि एयर फोर्स के दो हेलिकॉप्टरों को भी लोगों को बचाने के लिए तैनात किया गया है। मंगलवार को कैबिनेट सचिव राजीव गाबा की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति (एनसीएमसी) की बैठक में बिहार की स्थिति की समीक्षा की गई, जहां 16 जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
बैठक के बाद बताया गया कि एनडीआरएफ की छह टीमों को पटना में नियुक्त किया गया है। कोयला मंत्रालय की तरफ से पटना की गलियों में भरा पानी निकालने के लिए चार बड़े पंप भेजे गए हैं, जो हर मिनट करीब 11 हजार 340 लीटर पानी बाहर फेंक सकते हैं। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी ने भी मंगलवार को माना कि बिहार और कर्नाटक में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर है। रेड्डी ने कहा, यह एक प्राकृतिक आपदा है। मेरे सहयोगी नित्यानंद राय गृह मंत्रालय की तरफ से स्थिति पर नजर रख रहे हैं।
बिहार के जलसंसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने मंगलवार को राज्य के हित में फरक्का बांध को नष्ट किए जाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा, राज्य सरकार इस बांध के कारण पैदा हो रही समस्याओं के बारे में केंद्र सरकार को लिख रही है। उन्होंने बंगाल को पेयजल मुहैया कराने के लिए 1975 में चालू हुए इस बांध को बिहार के लोगों के लिए ‘दुख’ का कारण करार दिया।